सीतापुर के लहरपुर और आसपास के इलाकों में पिछले कुछ महीनों से एक नाम दबे स्वर में लिया जाता था—‘कोहिनूर गैंग’। इलाके के लोग इस गैंग से इतने खौफ में थे कि कोई खुलकर इनके खिलाफ बोलने तक की हिम्मत नहीं जुटा पाता था। गैंग का सरगना प्रियांशु बड़ी चालाकी से युवाओं को अपने जाल में फंसाता था। महंगी बाइक, आईफोन, ब्रांडेड कपड़े और सोशल मीडिया पर ‘डॉन वाली लाइफ’ दिखाकर वह बेरोजगार लड़कों को अपराध की दुनिया में खींच लाता था।
प्रियांशु की सबसे खतरनाक चाल थी नाबालिग लड़कों को अपने साथ रखना। गैंग में कई किशोर शामिल थे, ताकि वारदात के दौरान किसी को उन पर शक न हो। यही वजह थी कि यह गिरोह पुलिस की आंखों में धूल झोंककर लगातार बड़ी लूट की घटनाओं को अंजाम देता रहा।पॉलिटेक्निक छात्र, सेल्समैन और छोटे कस्बों के युवा इस गैंग के झांसे में आकर अपराध को ‘शॉर्टकट सक्सेस’ समझ बैठे थे।
3 अप्रैल को टड़ियावां-गोपामऊ मार्ग पर सर्राफा व्यापारी से हुई 50 लाख की लूट के बाद ‘कोहिनूर गैंग’ खुद को इलाके का नया माफिया समझने लगा था। लूट के पैसों से नेपाल भागने, वहां फोटोशूट कराने और लग्जरी लाइफ जीने के सपने देखे जा रहे थे। लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि हरदोई पुलिस चुपचाप उनकी पूरी कुंडली तैयार कर रही है। सर्विलांस, सीसीटीवी और मुखबिर तंत्र ने आखिरकार इस गैंग का खेल खत्म कर दिया।
6 मई की रात टड़ियावां थाना क्षेत्र में पिपरी-बर्रा तिराहे पर पुलिस ने जब घेराबंदी की, तो प्रियांशु ने फायरिंग कर भागने की कोशिश की। मगर इस बार सामने हरदोई पुलिस थी। जवाबी कार्रवाई में गोली लगते ही उसका ‘डॉन वाला रौब’ जमीन पर आ गिरा। पुलिस पहले ही गैंग के कई सदस्यों को जेल भेज चुकी है और अब पूरा ‘कोहिनूर गैंग’ सलाखों के पीछे पहुंच चुका है। जिन युवाओं को यह गिरोह अपराध का सपना दिखा रहा था, आज वही जेल की अंधेरी कोठरी में अपने फैसले पर पछता रहे हैं।
हरदोई पुलिस अब गैंग के बाकी साथियों और नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। कौन फंडिंग करता था, किसके संपर्क में गैंग था और किन वारदातों में इनका हाथ रहा—हर पहलू खंगाला जा रहा है। ‘कोहिनूर गैंग’ का अंत उन युवाओं के लिए बड़ा सबक है, जो सोशल मीडिया की नकली चमक देखकर अपराध को आसान रास्ता समझ लेते हैं। कानून की नजर देर से सही, लेकिन जब उठती है तो पूरा साम्राज्य बिखेर देती है।
घटना का संक्षिप्त विवरण
3 अप्रैल को हरदोई के टड़ियावां थाना क्षेत्र में गोपामऊ के रहने वाले सर्राफा कारोबारी सर्वेश रस्तोगी अपने बेटे गौरव रस्तोगी के साथ दुकान बंद कर बाइक से घर लौट रहे थे। तभी रास्ते में दो बाइकों पर सवार बदमाशों ने उनकी बाइक रोक ली और तमंचे के बल पर जेवरात से भरा बैग व करीब डेढ़ लाख रुपये की नकदी लूटकर फरार हो गए।इस सनसनीखेज वारदात से इलाके में हड़कंप मच गया था।
घटना के खुलासे के लिए पुलिस ने सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर तंत्र की मदद ली। जांच में सामने आया कि वारदात को ‘कोहिनूर गैंग’ ने अंजाम दिया था, जिसमें दो नाबालिग समेत सात लोग शामिल थे। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि दो नाबालिगों को संरक्षण में लिया गया। मुठभेड़ के दौरान पांच बदमाश पकड़े गए, जिनमें चार के पैर में गोली लगी। पुलिस ने गैंग के कब्जे से करीब 50 लाख रुपये के जेवरात और नकदी भी बरामद की।


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