अमृतपुर। गंगा की बाढ़ ने फकरपुर जालिम गांव के ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गांव के कई परिवारों के घरों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। पानी भरने से घरेलू सामान और खाद्यान्न खराब होने की स्थिति में हैं, वहीं पशुओं के सामने चारे का संकट भी खड़ा हो गया है। हालात बिगड़ने पर कुछ परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर बताए जा रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि बाढ़ का पानी उनके घरों तक पहुंचने के बावजूद उन्हें अभी तक अपेक्षित राहत सामग्री नहीं मिल सकी है। ग्रामीणों ने राहत वितरण को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि कुछ ऐसे स्थानों पर राहत सामग्री बांटी गई, जहां बाढ़ का पानी अभी घरों तक नहीं पहुंचा था, जबकि वास्तविक रूप से प्रभावित परिवार राहत के इंतजार में हैं।
घर डूबे, अनाज भीग रहा, मवेशियों के चारे का संकट
ग्रामीणों के मुताबिक बाढ़ के पानी के कारण घरों में रखा खाद्यान्न और घरेलू सामान प्रभावित हो रहा है। पशुपालकों के सामने मवेशियों के लिए चारे की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पानी का स्तर और बढ़ा तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
राहत वितरण की व्यवस्था पर उठे सवाल
बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव में तत्काल टीम भेजकर वास्तविक स्थिति का सर्वे कराया जाए। इसके साथ ही प्रभावित परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर राशन, आवश्यक राहत सामग्री और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि राहत वितरण में पारदर्शिता बरती जाए और जिन परिवारों के घरों में पानी पहुंच चुका है, उनकी स्थिति को प्राथमिकता से दर्ज किया जाए। उनका कहना है कि कागजी आकलन के बजाय मौके पर पहुंचकर वास्तविक हालात देखने की जरूरत है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब फकरपुर जालिम में बाढ़ का पानी ग्रामीणों के घरों तक पहुंच चुका है, तो प्रभावित परिवारों तक राहत कब पहुंचेगी? प्रशासन की टीम मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेती है या नहीं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।


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