लखनऊ में गार्ड ऑफ ऑनर के बाद पैतृक गांव पहुंचा पार्थिव शरीर, अंतिम सलामी के दौरान गम में डूबा साहबगंज
फर्रुखाबाद/ मेरापुर थाना क्षेत्र के साहबगंज गांव में बुधवार का दिन बेहद गमगीन रहा। देश की सेवा में तैनात सैनिक गजेंद्र सिंह राठौड़ के पार्थिव शरीर को जब सैन्य सम्मान के साथ पैतृक गांव लाया गया तो हर आंख नम हो उठी। गांव की गलियों से लेकर अंतिम संस्कार स्थल तक मातम पसरा रहा। सबसे मार्मिक दृश्य उस समय सामने आया, जब महज 12 वर्षीय बेटे अखिल ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। पिता को अंतिम विदाई देते बेटे को देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें छलक उठीं।
ड्यूटी के दौरान अचानक बिगड़ी तबीयत
परिजनों के अनुसार गजेंद्र सिंह गुजरात के अहमदनगर में ड्यूटी पर थे। इसी दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। सेना के साथियों ने तत्काल उन्हें उपचार के लिए मुंबई के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। चिकित्सकों के प्रयास के बावजूद सोमवार को इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। सैनिक की मौत की खबर जैसे ही परिवार तक पहुंची, घर में चीख-पुकार मच गई।
लखनऊ में दी गई अंतिम सैन्य सलामी
सैनिक के पार्थिव शरीर को मंगलवार को लखनऊ स्थित मिलिट्री छावनी ले जाया गया, जहां सैन्य सम्मान के साथ उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद बुधवार को पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव साहबगंज पहुंचा। सूबेदार हेम सिंह के नेतृत्व में पहुंचे सैन्य जवानों ने पूरे सम्मान के साथ दिवंगत सैनिक को अंतिम सलामी दी।
सैन्य जवानों की टुकड़ी द्वारा दी गई अंतिम सलामी के बीच गांव का माहौल बेहद भावुक हो गया। तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को अंतिम विदाई देते समय ग्रामीणों ने भारत माता के वीर सपूत को नम आंखों से श्रद्धांजलि दी।
जिस पिता की उंगली पकड़कर चलता था बेटा, उसी ने दी मुखाग्नि
अंतिम संस्कार का सबसे दर्दनाक पल तब आया, जब गजेंद्र सिंह के 12 वर्षीय बेटे अखिल ने पिता को मुखाग्नि दी। पिता को अंतिम विदाई देने की इस घड़ी में बच्चे का दर्द देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो उठा। परिवार पर अचानक टूटे इस दुख ने पत्नी सोनिका देवी और दोनों बच्चों को गहरे सदमे में डाल दिया है।
गजेंद्र सिंह अपने पीछे पत्नी सोनिका देवी, बेटे अखिल (12) और आदित्य (8) को छोड़ गए हैं। दोनों बच्चे कायमगंज के एक निजी विद्यालय में पढ़ते हैं। पति को खोने के बाद पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है।
सरल स्वभाव के थे गजेंद्र, गांव में थी अलग पहचान
ग्रामीणों ने बताया कि गजेंद्र सिंह बेहद मिलनसार और सरल स्वभाव के व्यक्ति थे। गांव में उनका व्यवहार सभी के प्रति आत्मीय रहा। देश की सेवा में रहते हुए भी उनका अपने गांव और लोगों से जुड़ाव बना रहा।
बुधवार को जब उनकी अंतिम यात्रा निकली तो बड़ी संख्या में ग्रामीण उनके अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। हर चेहरा गम में डूबा था और हर जुबान पर दिवंगत सैनिक के लिए श्रद्धांजलि के शब्द थे।
देश की सेवा करते हुए दुनिया से विदा हुए गजेंद्र सिंह को गांव ने सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी, लेकिन पीछे रह गया एक ऐसा परिवार, जिसके लिए पिता और पति की कमी कभी पूरी नहीं हो सकेगी।


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