रहमत,बरकत और इबादत का है महीना-फ़ैज़ल खान

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रमज़ान इस्लाम धर्म का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। इस महीने में दुनियाभर के मुसलमान रोज़ा रखकर अल्लाह की इबादत करते हैं और अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। रमज़ान का महीना इंसान को सब्र, परहेज़गारी और इंसानियत का पाठ सिखाता है।
रमज़ान के महीने में मुसलमान सुबह फज्र की अज़ान से पहले सहरी करते हैं और उसके बाद पूरे दिन रोज़ा रखते हैं। सूरज ढलने के बाद मगरिब की अज़ान के साथ रोज़ा खोला जाता है, जिसे इफ्तार कहा जाता है। इफ्तार में खजूर और पानी से रोज़ा खोलना सुन्नत माना जाता है।
इस महीने में लोग ज्यादा से ज्यादा नमाज़, कुरआन की तिलावत और दुआ करते हैं। मस्जिदों में रात के समय तरावीह की नमाज़ अदा की जाती है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। रमज़ान का मकसद केवल भूखा-प्यासा रहना नहीं बल्कि बुरे कामों से बचना, गरीबों की मदद करना और अपने चरित्र को बेहतर बनाना भी है।
रमज़ान में मुसलमान ज़कात और सदक़ा देकर जरूरतमंदों की मदद करते हैं ताकि समाज में बराबरी और भाईचारा कायम रहे। इसी महीने में शब-ए-कद्र भी आती है, जिसे हजार महीनों से बेहतर रात बताया गया है।
रमज़ान के खत्म होने पर मुसलमान ईद-उल-फितर का त्योहार मनाते हैं। यह दिन खुशियों, भाईचारे और मोहब्बत का संदेश देता है।

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