15-20 साल से बंद सीतापुर आई हॉस्पिटल के दिन फिरेंगे! डीएम ने संभाली कमान, जर्जर अस्पताल के कायाकल्प की शुरू हुई कवायद

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फर्रुखाबाद। करीब डेढ़ से दो दशक से बंद पड़े फतेहगढ़ के सीतापुर आई हॉस्पिटल को अब नई जिंदगी मिलने की उम्मीद जगी है। लंबे समय से वीरान पड़े अस्पताल को दोबारा मरीजों की सेवा के लिए तैयार कराने की दिशा में जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने पहल शुरू कर दी है। शुक्रवार को डीएम ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद उपाध्याय के साथ अस्पताल का स्थलीय निरीक्षण कर मौके की स्थिति का जायजा लिया।

निरीक्षण में अस्पताल की बदहाल तस्वीर सामने आई। बताया गया कि अस्पताल पिछले 15-20 वर्षों से प्रभावी रूप से संचालित नहीं हो रहा है, जिसके चलते भवन भी जर्जर हालत में पहुंच गया है। अस्पताल के बंद होने का सीधा असर फर्रुखाबाद के साथ आसपास के क्षेत्रों के उन लोगों पर पड़ा है, जिन्हें बेहतर और सुलभ नेत्र चिकित्सा के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है।

जमीन से लेकर जर्जर भवन तक होगी पूरी जांच

डीएम ने अस्पताल को पुनः क्रियाशील कराने के लिए संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए। जिला शासकीय अधिवक्ता (सिविल) कृष्णकांत महाजन को भूमि से जुड़े अभिलेखों का अवलोकन कर विस्तृत आख्या प्रस्तुत करने को कहा गया है। वहीं पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता मुरलीधर को भवन का पूर्ण भौतिक निरीक्षण कर उसकी मौजूदा स्थिति और आवश्यक कार्यों की विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए।

आई रिलीफ सोसाइटी के जरिए आगे बढ़ेगा काम

मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित किया गया कि संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए आई रिलीफ सोसाइटी के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उद्देश्य साफ है कि वर्षों से बंद पड़े अस्पताल को व्यवस्थित तरीके से पुनः चिकित्सा सेवाओं के लिए तैयार किया जा सके।

1963 में जनता और सरकारी सहयोग से बना था अस्पताल

सीतापुर आई हॉस्पिटल का इतिहास भी काफी पुराना है। वर्ष 1963 में जिला प्रशासन द्वारा भूमि अधिग्रहित कर, जनता के सहयोग और शासकीय अनुदान से अस्पताल का निर्माण कराया गया था। अस्पताल को पूर्व में शासन से अनुदान भी मिलता रहा, लेकिन वर्ष 2022 से यह अनुदान बंद है।

अब डीएम की पहल के बाद अस्पताल के पुनरुद्धार की संभावनाएं फिर से मजबूत हुई हैं। यदि योजना धरातल पर उतरती है और सीतापुर आई हॉस्पिटल दोबारा शुरू होता है, तो फर्रुखाबाद सहित आसपास के क्षेत्रों के लोगों को स्थानीय स्तर पर बेहतर नेत्र चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी।

लंबे इंतजार के बाद उम्मीद की किरण: वर्षों से बंद अस्पताल के निरीक्षण और अधिकारियों को दिए गए निर्देशों से क्षेत्रवासियों में उम्मीद जगी है कि जर्जर पड़े अस्पताल में फिर से इलाज की रोशनी लौट सकती है।

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