13वें तीर्थंकर की पावन नगरी में भक्ति का सैलाब, दशलक्षण महापर्व पर गूंजे जयकारे

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कंपिल के दिगंबर जैन मंदिर में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब, अभिषेक-शांतिधारा के साथ भक्तों ने की भगवान विमलनाथ स्वामी की विशेष आराधना

कंपिल/फर्रुखाबाद। ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी कंपिल इन दिनों दशलक्षण महापर्व की भक्ति में पूरी तरह सराबोर नजर आ रही है। नगर के दिगंबर जैन मंदिर में दस दिवसीय महापर्व को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह है। शनिवार को अष्टमी के विशेष अवसर पर सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया। देखते ही देखते मंदिर परिसर भक्तों से गुलजार हो उठा। घंटियों की गूंज, धार्मिक मंत्रोच्चार और भगवान के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर भगवान विमलनाथ स्वामी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। भगवान का अभिषेक और शांतिधारा कर श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लिया। इस दौरान मोक्ष कल्याणक दिवस की धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विशेष पूजा-अर्चना की गई। बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और बच्चों ने कार्यक्रमों में भाग लेकर धर्मलाभ प्राप्त किया।

13वें तीर्थंकर भगवान विमलनाथ स्वामी की जन्मभूमि है कंपिल

दिगंबर जैन मंदिर के प्रबंधक अनुराग जैन ने बताया कि कंपिल जैन समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र तीर्थस्थल है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह भगवान 1008 विमलनाथ स्वामी, जो जैन धर्म के 13वें तीर्थंकर हैं, की जन्मभूमि है। यही कारण है कि दशलक्षण महापर्व के दौरान देश-प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालुओं की आस्था कंपिल की ओर खिंची चली आती है।

उन्होंने बताया कि 16 सितंबर से शुरू हुआ दशलक्षण महापर्व 25 सितंबर तक चलेगा। दस दिनों तक मंदिर में प्रतिदिन धार्मिक कार्यक्रम, पूजा-अर्चना और अन्य अनुष्ठान आयोजित किए जा रहे हैं। सुबह से लेकर शाम तक मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की चहल-पहल बनी रहती है।

दस दिन, दस धर्म और आत्मशुद्धि का संदेश

दशलक्षण महापर्व केवल धार्मिक अनुष्ठानों का पर्व नहीं बल्कि आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि का अवसर भी माना जाता है। जैन धर्म की परंपरा में इन दस दिनों के दौरान उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्जव, उत्तम शौच, उत्तम सत्य, उत्तम संयम, उत्तम तप, उत्तम त्याग, उत्तम आकिंचन्य और उत्तम ब्रह्मचर्य जैसे दस धर्मों का पालन करने पर जोर दिया जाता है।

इन धर्मों के माध्यम से श्रद्धालुओं को क्रोध, अहंकार, छल-कपट और असत्य से दूर रहकर संयम, त्याग, सच्चाई और आत्मानुशासन का मार्ग अपनाने का संदेश दिया जाता है। मंदिर में होने वाले धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालु इन सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प भी लेते नजर आ रहे हैं।

सुबह से शाम तक मंदिर में बनी रहती है रौनक

महापर्व को लेकर मंदिर परिसर में सुबह से ही धार्मिक गतिविधियां शुरू हो जाती हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों और महिलाओं तक सभी वर्ग के लोग श्रद्धा के साथ कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं। पूजा-अर्चना के दौरान मंदिर परिसर में आध्यात्मिक वातावरण बना रहता है। श्रद्धालु भगवान विमलनाथ स्वामी का अभिषेक कर शांतिधारा करते हुए परिवार और समाज की सुख-शांति की कामना कर रहे हैं।

जैन समाज के लोगों का कहना है कि कंपिल की धार्मिक धरती पर दशलक्षण महापर्व मनाने का अनुभव अपने आप में विशेष है। तीर्थंकर की जन्मभूमि होने के कारण यहां होने वाले धार्मिक आयोजनों के प्रति श्रद्धालुओं में विशेष आस्था देखने को मिलती है।

25 सितंबर को क्षमावाणी के साथ होगा महापर्व का समापन

दशलक्षण महापर्व का भव्य समापन 25 सितंबर को होगा। अंतिम दिन विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद क्षमावाणी का पर्व मनाया जाएगा। इस अवसर पर जैन समाज के लोग एक-दूसरे से अपनी जाने-अनजाने हुई भूलों के लिए क्षमा मांगेंगे और आपसी प्रेम, सद्भाव एवं भाईचारे का संदेश देंगे।

महापर्व के दौरान मंदिर परिसर में अध्यक्ष पुष्पराज डागा जैन, सुशील कुमार जैन, पवन कुमार जैन, अनुराग जैन, आशीष जैन, रतन जैन, सोनू जैन, नेहा जैन, प्रियंका जैन समेत बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु मौजूद रहे। दशलक्षण महापर्व को लेकर पूरे कंपिल क्षेत्र में धार्मिक उत्साह और आस्था का माहौल बना हुआ है।

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