जश्न-ए-गौसिया में गूंजे नातिया कलाम, फूल-चादर पेश कर मांगी अमन-चैन की दुआ
फतेहगढ़, 29 सितंबर। रबी-उस्सानी की 16वीं शरीफ के मौके पर मंगलवार को लोको स्थित ऐतिहासिक दरगाह हज़रत मखदूम शाह सय्यद शहाबुद्दीन औलिया अलैहि रहमा में जश्न-ए-गौसिया अकीदत और एहतराम के साथ मनाया गया। सुबह से ही दरगाह शरीफ पर जायरीनों की आमद शुरू हो गई और देखते ही देखते परिसर अकीदतमंदों से गुलजार हो उठा। दूर-दराज से पहुंचे लोगों ने फूल और चादर पेश कर अपनी अकीदत का इजहार किया तथा मुल्क में अमन, खुशहाली और सलामती के लिए दुआ मांगी।
दरगाह पर आयोजित कार्यक्रम में गंगा-जमुनी तहजीब की खूबसूरत तस्वीर भी देखने को मिली। विभिन्न समुदायों के लोगों ने कार्यक्रम में शामिल होकर आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का संदेश दिया। जायरीनों के लिए लंगर का भी इंतजाम किया गया।
कार्यक्रम में सदर-ए-मुफ्ती गुलाम आसी साहब ने रबी-उस्सानी की धार्मिक अहमियत और बुजुर्गाने दीन की तालीमात पर रोशनी डाली। उन्होंने गौस-ए-आजम हजरत शेख अब्दुल कादिर जीलानी रहमतुल्लाह अलैह की याद में मनाई जाने वाली ग्यारहवीं शरीफ का जिक्र करते हुए इबादत, जिक्र-ओ-अजकार, दुआ, सदका और नेक आमाल की अहमियत बताई।
वहीं सज्जादा नशीन एवं जानशीन-ए-हुजूर मोहब्बत शाह पीरजादा शाह मोहम्मद वसीम उर्फ मोहम्मद मियां ने कहा कि गौस-ए-आजम हजरत सैयद अब्दुल कादिर जीलानी रहमतुल्लाह अलैह बुजुर्गाने दीन में बुलंद मकाम रखने वाली शख्सियत हैं। उनकी तालीमात इंसान को इबादत के साथ नेक अमल, इंसानियत, मोहब्बत और भाईचारे की राह दिखाती हैं। ऐसे मुबारक मौकों का उद्देश्य बुजुर्गाने दीन की तालीमात को याद करना और समाज में प्रेम तथा भाईचारे को मजबूत करना है।
उन्होंने देश में अमन-ओ-अमान, आपसी भाईचारे, खुशहाली और सलामती के लिए विशेष दुआ की।
कार्यक्रम के दौरान अंसार साबरी ने बारगाह-ए-रिसालत ﷺ में नातिया कलाम पेश किए। नातिया कलाम से पूरा माहौल रूहानी हो उठा और मौजूद जायरीनों ने अकीदत के साथ अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।
इस मौके पर रफत हुसैन, तनवीर साबरी, फजल हुसैन, साहिबे आलम साबरी, आकाश और शिवम सहित बड़ी संख्या में जायरीन, अकीदतमंद और स्थानीय लोग मौजूद रहे।


+ There are no comments
Add yours