कायमगंज। कृष्णा प्रेस परिसर सदवाड़ा में राष्ट्रीय प्रगतिशील फोरम के तत्वावधान में महान क्रांतिकारी एवं शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह की जयंती के अवसर पर विचार गोष्ठी एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने स्वतंत्रता आंदोलन में क्रांतिकारियों के योगदान पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि देश की आजादी के संघर्ष में क्रांतिकारियों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वक्ताओं ने कहा कि भारत को स्वतंत्रता केवल शांतिपूर्ण आंदोलनों से नहीं, बल्कि क्रांतिकारियों के साहस, त्याग और संघर्ष की शक्ति से भी प्राप्त हुई।
गोष्ठी में प्रोफेसर रामबाबू मिश्र रत्नेश ने कहा कि विश्व क्रांति के इतिहास में सरदार भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और अशफाक उल्ला खान जैसे पराक्रमी महावीरों का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारतीय क्रांति के इन अनमोल राष्ट्ररत्नों के योगदान को इतिहास में अपेक्षित स्थान नहीं मिल सका। क्रांतिकारियों का जीवन आज भी युवाओं के लिए साहस, त्याग और राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा का स्रोत है।
प्रख्यात गीतकार पवन बाथम ने कहा कि सरदार भगत सिंह ने फ्रांस और रूस की जनक्रांतियों का गहन अध्ययन किया था। उनका सपना केवल अंग्रेजी शासन से मुक्ति तक सीमित नहीं था, बल्कि वे समानता, भाईचारे और स्वतंत्रता पर आधारित समाज की स्थापना के पक्षधर थे। उनका राष्ट्रवाद मानवतावाद की भावना से जुड़ा हुआ था।
प्रधानाचार्य शिवकांत शुक्ला, अमरनाथ शुक्ला, पूर्व प्रधानाचार्य अहिवरन सिंह गौर, वी.एस. तिवारी, शिवकुमार दुबे और जेपी दुबे सहित अन्य वक्ताओं ने आधुनिक भारत के इतिहास के निष्पक्ष पुनर्लेखन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को स्वतंत्रता आंदोलन के सभी पक्षों और क्रांतिकारियों के योगदान से परिचित कराया जाना चाहिए, ताकि उनके त्याग और बलिदान की वास्तविक तस्वीर सामने आ सके।
डॉ. सुनीत सिद्धार्थ ने कहा कि देश के युवाओं को सत्ता और पद की राजनीति से आगे बढ़कर स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों के आदर्शों को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगत सिंह का जीवन देशहित, सामाजिक समानता और वैचारिक जागरूकता का संदेश देता है।
शिक्षक अनुपम मिश्रा ने अपनी पंक्तियों के माध्यम से वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों पर विचार व्यक्त करते हुए कहा—
“राजनीति फैला रही जन-जन में है भ्रांति,
आज जरूरी हो गई है वैचारिक क्रांति।”
छात्र यशवर्धन ने भी अपनी कविता के माध्यम से शहीदों के विचारों को याद किया—
“अगर क्रांतिकारी कहीं जीवित होते आज,
होता देश अखंड फिर, बंटता नहीं समाज।”
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि भगत सिंह का जीवन केवल इतिहास का अध्याय नहीं, बल्कि आज की पीढ़ी के लिए विचार, साहस और राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा है। उनके विचारों को समझना और युवाओं तक पहुंचाना समाज की जिम्मेदारी है।
गोष्ठी में विष्णु दुबे, अजय पाठक, निधि मिश्रा, शिक्षामित्र मंजू मिश्रा, कीर्ति दुबे सहित अनेक लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में शहीद-ए-आजम भगत सिंह के जीवन, संघर्ष और विचारों को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।


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