भीषण गर्मी और कम बारिश का असर: कायमगंज में सब्जियों व मसालों के दाम आसमान पर, रसोई का बजट बिगड़ा

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कायमगंज/फर्रुखाबाद
भीषण गर्मी और समय पर पर्याप्त बारिश न होने का असर अब आम लोगों की रसोई तक साफ दिखाई देने लगा है। कायमगंज की सब्जी मंडियों और स्थानीय बाजारों में हरी सब्जियों के साथ-साथ मसालों की कीमतों में अचानक भारी उछाल आ गया है। कई प्रमुख सब्जियों के दाम पिछले कुछ दिनों में दोगुने से लेकर तीन गुना तक बढ़ गए हैं, जिससे आम और मध्यमवर्गीय परिवारों की रसोई का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है। महंगाई की इस मार से गृहिणियां सबसे अधिक परेशान हैं, क्योंकि रोजमर्रा की जरूरत की सब्जियां और मसाले खरीदना अब पहले की तुलना में काफी महंगा हो गया है।

स्थानीय व्यापारियों के अनुसार भीषण गर्मी के कारण खेतों में सब्जियों का उत्पादन प्रभावित हुआ है। वहीं पर्याप्त बारिश न होने से फसलें भी कमजोर हुई हैं। स्थानीय स्तर पर आवक कम होने के कारण कई सब्जियां दूसरे राज्यों से मंगानी पड़ रही हैं, जिससे परिवहन लागत बढ़ने के साथ खुदरा कीमतों में भी तेजी आ गई है।

बाजार में टमाटर, जो कुछ दिन पहले तक 20 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, अब 40 से 50 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। स्थानीय उत्पादन कम होने के कारण इसे बेंगलुरु समेत अन्य शहरों से मंगाया जा रहा है। हरी मिर्च की कीमत भी 20 रुपये से बढ़कर लगभग 60 रुपये प्रति किलो हो गई है। फूल गोभी, शिमला मिर्च और नींबू 120 रुपये प्रति किलो तक बिक रहे हैं, जबकि परवल 100 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है। बैंगन और बंद गोभी 60 रुपये प्रति किलो तथा तोरई, भिंडी, लौकी और पालक करीब 40 रुपये प्रति किलो बिक रहे हैं।

सब्जियों के साथ-साथ मसालों की कीमतों ने भी लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अदरक 240 रुपये प्रति किलो और हरा धनिया 400 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। पिसी लाल मिर्च 360 रुपये, धनिया पाउडर 300 रुपये, हल्दी 290 रुपये तथा जीरा 280 रुपये प्रति किलो के भाव पर बाजार में उपलब्ध है। व्यापारियों का कहना है कि अधिकांश मसालों के दामों में 40 से 60 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है।

गृहिणियों का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई के कारण घर का मासिक बजट बिगड़ गया है। पहले जहां लोग विभिन्न प्रकार की सब्जियां खरीद लेते थे, वहीं अब उन्हें सीमित मात्रा में ही खरीदारी करनी पड़ रही है। कई परिवारों ने महंगी सब्जियों के स्थान पर सस्ती सब्जियों का विकल्प अपनाना शुरू कर दिया है।

परचून और सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि बाजार में मांग लगातार बनी हुई है, जबकि उत्पादन और आपूर्ति कम होने से कीमतों में तेजी बनी हुई है। उनका मानना है कि जब तक मौसम अनुकूल नहीं होता और अच्छी बारिश नहीं होती, तब तक सब्जियों और मसालों के दामों में राहत मिलने की संभावना कम है।

महंगाई की इस मार ने आम आदमी की थाली का स्वाद फीका कर दिया है। यदि जल्द मौसम में सुधार नहीं हुआ और स्थानीय उत्पादन नहीं बढ़ा, तो आने वाले दिनों में रसोई का खर्च और अधिक बढ़ सकता है, जिससे आम उपभोक्ताओं की मुश्किलें और बढ़ने की आशंका है।

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