फर्रुखाबाद/शहर के आवास विकास स्थित मदर केयर हॉस्पिटल में प्रसव के दौरान एक महिला और उसके नवजात शिशु की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अस्पताल को सील कर दिया। घटना के बाद पूरे जिले में हड़कंप मच गया और जिलाधिकारी के सख्त निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल पहुंचकर जांच शुरू की।
जांच के लिए पहुंचे उपमुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं नोडल अधिकारी (पंजीकरण) डॉ. आर.सी. माथुर के नेतृत्व में अधिकारियों ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि अस्पताल में न तो कोई संचालक मौजूद मिला, न कोई चिकित्सक और न ही कोई अधिकृत प्रतिनिधि। टीम ने जब इलाज, भर्ती, प्रसव और महिला की मौत से संबंधित अभिलेख मांगे तो अस्पताल प्रबंधन कोई भी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।
स्वास्थ्य विभाग की जांच में यह भी सामने आया कि मरीजों का रिकॉर्ड व्यवस्थित ढंग से नहीं रखा गया था। उपचार संबंधी दस्तावेजों के अभाव और जांच में असहयोग को गंभीर लापरवाही मानते हुए विभाग ने तत्काल प्रभाव से अस्पताल को सील कर दिया। कार्रवाई के दौरान पूरे परिसर को अपने कब्जे में लेकर आगे की जांच शुरू कर दी गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल प्रबंधन को सीसीटीवी फुटेज, मरीजों के रिकॉर्ड और अन्य सभी साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही महिला की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए मातृ मृत्यु ऑडिट (Maternal Death Audit) भी शुरू कर दिया गया है। विशेषज्ञों की टीम इलाज की पूरी प्रक्रिया और अस्पताल के संचालन से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच करेगी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद उपाध्याय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मरीजों की जान के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि किसी निजी अस्पताल में पंजीकरण नियमों का उल्लंघन, रिकॉर्ड में गड़बड़ी या उपचार में लापरवाही पाई जाती है तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस कार्रवाई के बाद जिले के निजी अस्पतालों में भी हड़कंप का माहौल है। स्वास्थ्य विभाग ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में अन्य निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम की भी सघन जांच की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।


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