आय से अधिक संपत्ति में उदयपाल के खिलाफ विजिलेंस थाने में प्राथमिकी

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फर्रुखाबाद। कंपिल के पूर्व चेयरमैन उदयपाल सिंह यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार के तहत आय से अधिक संपत्ति के मामले में विजिलेंस थाना कानपुर में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पूर्व चेयरमैन के खिलाफ 45 करोड़ के भ्रष्टाचार की शिकायत दर्ज कराई गई थी।
उदयपाल की मां राजवती यादव नगर पंचायत कंपिल की अध्यक्ष हैं।
कंपिल निवासी हिकमत उल्ला ने पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष गांव कमलाईपुर व हाल पता मोहल्ला गढ़ी टीचर्स कॉलोनी निवासी उदयपाल सिंह के खिलाफ उसके कार्यकाल के दौरान 45 करोड़ का भ्रष्टाचार करने की बात वर्ष 2019 में लोकायुक्त से शिकायत की थी। लोकायुक्त के आदेश पर तत्कालीन जिलाधिकारी मोनिका रानी ने जांच में दोषी पाए जाने पर शासन को रिपोर्ट भेजी थी। शिकायत में यह भी कहा गया था कि वर्ष 2012 में उदयपाल सिंह यादव पहली बार कंपिल के चेयरमैन बने। 10 वर्ष के कार्यकाल में 45 करोड़ रुपये का घपला किया। इस मामले में शासन से टीम गठित कराई गई, इसमें 45 लाख रुपये का घपला पाया गया।
उदयपाल सिंह के खिलाफ जनपद के अलावा इटावा, एटा, मैनपुरी व कंपिल थाने में हत्या, बलवा, मारपीट, हत्या के प्रयास सहित कई मुकदमे दर्ज होने से वह तत्कालीन अपर जिलाधिकारी के निर्देश पर 19 दिसंबर 2022 को जिला बदर कर दिया था। वहीं शासन के आदेश पर हुई जांच के बाद 10 अक्टूबर 2024 को सतर्कता अधिष्ठान कानपुर के पुलिस अधीक्षक ने शिकायतकर्ता हिकमत उल्ला खां को भेजे पत्र में कहा कि आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में खुली जांच चल रही है। जांचकर्ता निरीक्षक सीमा सिंह के सामने प्रस्तुत होकर अपने बयान दर्ज कराएं। हिकमत उल्ला खां ने अपने बयान दर्ज कराए थे।
निरीक्षक की जांच में नगर पंचायत अध्यक्ष पद पर लोक सेवक के रूप में कार्य कर वैध स्रोतों से कुल 91 लाख 76 हजार 886 रुपये की संपत्ति के सापेक्ष उदयपाल सिंह के पास एक करोड़ तीन लाख 38 हजार 753 की संपत्ति पाई गई। इससे 11 लाख 61 हजार 867 रुपये की आय से अधिक संपत्ति के दोषी पाए गए। शासन के आदेश पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत निरीक्षक सीमा सिंह ने पूर्व चेयरमैन उदयपाल सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है।
जिलाबदर होने से मां को लड़ाया था अध्यक्षी का चुनाव
फर्रुखाबाद। वर्ष 2022 में जिला बदर होने के बाद उदयपाल सिंह यादव ने अपनी मां को चुनाव में उतारा था। अभी उनके खिलाफ 23 मुकदमे लंबित हैं। उदयपाल सिंह पुलिस में सिपाही पद पर भर्ती होने के बाद एसओजी में रहा था। नौकरी जाने के बाद वह नेता बन गया। उसकी दबंगई से क्षेत्र के लोग भयभीत हैं। वर्ष 2012 से 2022 तक नगर पंचायत अध्यक्ष रहने के दौरान मनमाने तरीके से विकास कार्य भी कराए। कस्बे के ही हिकमत उल्ला खां ने लोकायुक्त से शिकायत की थी।
उदयपाल सिंह के खिलाफ जनपद के अलावा इटावा, एटा, मैनपुरी व कंपिल थाने में हत्या, बलवा, मारपीट, हत्या के प्रयास सहित कई मुकदमे दर्ज होने से वह तत्कालीन अपर जिलाधिकारी के निर्देश पर 19 दिसंबर 2022 को उसे छह माह के लिए जिला बदर कर दिया था। इसी बीच नगर निकायों के अध्यक्षों का कार्यकाल पूरा होने से प्रशासनिक नियुक्त कर दिया गया। जिला बदर की छह माह की अवधि के दौरान निकाय चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई। इससे उदयपाल सिंह चुनाव नहीं लड़ सका और नगर पंचायत पर कब्जा जमाए रखने के लिए अपनी मां को चुनाव लड़ाया था। इन दिनों उदयपाल की मां कंपिल की नगर पंचायत अध्यक्ष हैं।
सपा में गहरी पैठ, पत्नी व भाई जिला पंचायत सदस्य
फर्रुखाबाद। भ्रष्टाचार में फंसे कंपिल के पूर्व चेयरमैन उदयपाल सिंह यादव का समाजवादी पार्टी से गहरा नाता है। वर्ष 2012 में सपा सरकार बनने के बाद उदयपाल सिंह की राजनीतिक बुनियाद बेहद मजबूत हो गई। सैफई परिवार से जुड़ा उदयपाल पुलिस में तैनाती के दौरान भी सपा के एक बड़े नेता के लिए काम करता था। इसका नेटवर्क भी विशेष शुरू हो गया था। इटावा में 2006 में एसएसओ प्रभारी की हत्या में भी उदयपाल को आरोपी बनाया गया था। सपा सरकार बनने के बाद उदयपाल सिंह भी राजनीति में उतरा। 2012 में पहली बार चुनाव लड़कर नगर पंचायत अध्यक्ष पद पर काबिज हुआ। 2017 में वह दोबारा नगर पंचायत अध्यक्ष बना। 2021 में हुए पंचायत चुनाव में उदयपाल की पत्नी गीता व भाई नीलू यादव जिला पंचायत सदस्य चुने गए।

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