बादलों ने रोकी चांद की राह, सुहागिनों का थमा रहा इंतजार! रात 10:05 बजे हुए चंद्रदेव के दीदार, फिर पतियों के चेहरे देखकर खोला व्रत

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कायमगंज में करवा चौथ पर मौसम ने बढ़ाई महिलाओं की बेचैनी, मोबाइल और पानी से भरी थाली में भी किए चांद के दर्शन; बाजारों में दिनभर रही खरीदारी की धूम

कायमगंज/ पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना को लेकर सुहागिन महिलाओं ने करवा चौथ का पर्व पूरे श्रद्धा, उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया। सुबह से ही घरों में पर्व की तैयारियां शुरू हो गई थीं। महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और पूरे दिन निर्जला व्रत रखकर पति की दीर्घायु की कामना की। लेकिन शाम ढलते ही आसमान में छाए बादलों ने व्रती महिलाओं की बेचैनी बढ़ा दी। चांद के दीदार के लिए महिलाओं को इस बार सामान्य से कहीं अधिक इंतजार करना पड़ा।

रात होते ही महिलाएं पूजा की थालियां सजाकर छतों और घरों की बालकनियों में पहुंच गईं। रात करीब 8:17 बजे से ही चांद निकलने की उम्मीद में आसमान की ओर निगाहें टिक गई थीं। समय बीतता गया, लेकिन बादलों की आवाजाही के चलते चंद्रदेव के दर्शन नहीं हो सके। रात 9:15 बजे तक भी आसमान में बादलों का डेरा बना रहा। दिल्ली और लखनऊ में बारिश की खबरों के बीच कायमगंज में भी महिलाएं चांद निकलने की जानकारी लेने के लिए परिचितों और रिश्तेदारों को फोन करती नजर आईं।

मोबाइल बना चांद देखने का सहारा

चांद के दीदार में हो रही देरी से महिलाओं की उत्सुकता लगातार बढ़ती रही। आखिरकार रात करीब 10:05 बजे आसमान में चांद दिखाई दिया तो महिलाओं के चेहरे खिल उठे। किसी ने पानी से भरी थाली में चंद्रमा का प्रतिबिंब देखकर पूजा पूरी की तो किसी ने मोबाइल फोन पर चांद के दर्शन किए। इसके बाद महिलाओं ने पारंपरिक रीति से छलनी के माध्यम से पहले चांद और फिर अपने पति का चेहरा देखा। पतियों ने अपनी व्रती पत्नियों को पानी पिलाकर व्रत का पारण कराया। चांद निकलते ही घरों में पूजा-पाठ और खुशियों का माहौल दिखाई दिया।

बाजारों में दिनभर रही करवा चौथ की रौनक

करवा चौथ को लेकर कायमगंज के बाजारों में सुबह से ही खास चहल-पहल देखने को मिली। महिलाओं ने साड़ी, चूड़ियां, बिंदी, मेहंदी, पूजा सामग्री, करवा और सौंदर्य प्रसाधनों की जमकर खरीदारी की। ब्यूटी पार्लरों में सजने-संवरने के लिए महिलाओं की भीड़ लगी रही, वहीं मेहंदी लगाने वाले स्टॉलों पर भी देर तक कतारें नजर आईं।

विशेष रूप से नवविवाहिताओं और जिन महिलाओं का पहला करवा चौथ था, उनमें पर्व को लेकर अलग ही उत्साह दिखाई दिया। हाथों में रची मेहंदी, सजी-धजी पूजा की थालियां और पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने पर्व की रौनक बढ़ा दी।

कुल मिलाकर, बादलों की लुकाछिपी और चांद के लंबे इंतजार ने इस बार करवा चौथ को यादगार बना दिया। रात 10:05 बजे चंद्रमा के दर्शन होते ही महिलाओं की प्रतीक्षा समाप्त हुई और पूजा-अर्चना के साथ सुहाग, प्रेम और विश्वास का यह पर्व हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ।

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