फर्रुखाबाद/ बाढ़ की विपरीत परिस्थितियों के बीच राहत शरणालय में गुरुवार को मानवीय संवेदनाओं और अपनत्व का ऐसा भावुक दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद लोगों के चेहरों पर मुस्कान ला दी। रक्षाबंधन के अवसर पर नन्हीं बच्चियों ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह को अपना बड़ा भाई मानते हुए उनकी कलाई पर राखी बांधी।
बीएसए श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह बाढ़ राहत शरणालय में पहुंचकर वहां बच्चों के लिए संचालित शैक्षणिक व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे थे। इसी दौरान कुछ बच्चियां हाथों में राखियां लेकर उनके पास पहुंचीं और बड़े ही प्यार व आत्मीयता के साथ उनकी कलाई पर राखी बांधी। अचानक हुए इस भावुक पल ने पूरे माहौल को खुशनुमा बना दिया।
खास बात यह रही कि कुछ बच्चियों ने अपने हाथों से कागज की राखियां तैयार की थीं। साधारण कागज से बनी इन राखियों में भले ही कोई चमक-दमक नहीं थी, लेकिन उनमें मासूमियत, विश्वास और स्नेह की ऐसी चमक थी, जिसने इस पर्व को और खास बना दिया।
बाढ़ के कारण अपने घरों से दूर राहत शरणालय में रह रहे बच्चों के बीच रक्षाबंधन का यह छोटा सा आयोजन रिश्तों की बड़ी खूबसूरती दिखा गया। बच्चियों ने बीएसए को राखी बांधकर भाई-बहन के रिश्ते का अपनापन महसूस किया, वहीं बीएसए ने भी उन्हें स्नेह और आशीर्वाद दिया।
इस दौरान यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए भावुक कर देने वाला रहा। नन्हीं बच्चियों की मुस्कान और उनके हाथों से बनाई गई राखियों ने यह संदेश दिया कि रिश्तों की खूबसूरती महंगे उपहारों में नहीं, बल्कि सच्चे प्रेम और भावनाओं में होती है।
राहत शरणालय में बाढ़ की परेशानियों के बीच रक्षाबंधन का यह पल लंबे समय तक याद रखा जाएगा। नन्हें हाथों से बनीं कागज की राखियां भले ही बेहद साधारण थीं, लेकिन उनमें समाया स्नेह किसी अनमोल तोहफे से कम नहीं था।
यह दृश्य एक बार फिर साबित कर गया कि रिश्ते केवल खून के नहीं होते—कभी मासूमियत से बंधी एक राखी भी दिलों के बीच अपनत्व की मजबूत डोर बांध देती है।


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