पुरवा (उन्नाव)। पुरवा क्षेत्र में बिजली व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा चुकी है और विभाग की मनमानी ने आम जनमानस का जीना मुहाल कर दिया है। पुरवा पावर हाउस से आपूर्ति प्राप्त करने वाले ग्रामीण अंचलों में अघोषित बिजली कटौती, बार-बार ट्रिपिंग और शटडाउन के चलते उपभोक्ताओं में भारी आक्रोश सुलग रहा है। इस विभागीय लापरवाही की सबसे ज्यादा मार बाजीखेड़ा फीडर से जुड़े गांवों पर पड़ रही है, जहां के ग्रामीण उपभोक्ता रोज-रोज के फाल्ट और रोस्टिंग से आजिज आ चुके हैं।
हालात इस कदर बदतर हो चुके हैं कि दिन में ही नहीं, बल्कि अब रातों में भी रोस्टिंग के नाम पर घंटों बिजली गुल रखी जा रही है। जहां पहले सुबह और दोपहर में तीन-तीन घंटे की रोस्टिंग होती थी, वहीं अब गांवों में रात के समय भी चार-चार घंटे तक बिजली काटी जा रही है। रात में बिजली गायब होने से भीषण गर्मी और मच्छरों के जानलेवा प्रकोप के बीच लोगों को जागकर अपनी रातें गुजारनी पड़ रही हैं।
सवाल यह उठता है कि आखिर ये ग्रामीण उपभोक्ता अपना दुखड़ा लेकर जाएं तो जाएं कहां? आज के आधुनिक दौर में जब ग्रामीण घरों में न तो मिट्टी के तेल की कोई सुविधा बची है और न ही प्रकाश की कोई अन्य मुकम्मल वैकल्पिक व्यवस्था है, तब विभाग की यह मनमानी सीधे तौर पर जनता के हकों पर डाका है। कस्बे के अलावा मंगतखेड़ा, बाजीखेड़ा, बेहटा और चमियानी फीडर से जुड़े इलाकों में सबसे ज्यादा अघोषित कटौती का चाबुक चलाया जा रहा है।
एक तरफ विधानसभा चुनाव सिर पर हैं, वहीं दूसरी तरफ लगातार हो रही इस अघोषित कटौती से बिजली विभाग सीधे तौर पर सरकार की किरकिरी कराने पर तुला हुआ है। जब भी इस बदहाल व्यवस्था के बारे में जिम्मेदार अधिकारियों से उनका पक्ष जानने की कोशिश की जाती है, तो वे कोई भी संतोषजनक जवाब देने के बजाय मामले को टालते हुए नजर आते हैं।
शासन-प्रशासन और उच्चाधिकारियों को पुरवा पावर हाउस की इस लचर कार्यप्रणाली का तत्काल संज्ञान लेना चाहिए। यदि बाजीखेड़ा फीडर सहित अन्य ग्रामीण इलाकों की विद्युत आपूर्ति में अविलंब सुधार नहीं किया गया, तो अंधेरे और उमस में घुट रहे इन ग्रामीणों का यह आक्रोश किसी भी दिन सड़कों पर बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।
हरिकृष्ण शुक्ल उन्नाव


+ There are no comments
Add yours