सनातन और राष्ट्र रक्षा की मुहिम को योगी की सराहना, ‘हिंदवी स्वराज्य 369’ के संस्थापक आर्यना नंद सम्मानित

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सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रमाणपत्र देकर बढ़ाया हौसला, बोले—युवाओं का जड़ों और सनातन संस्कृति से जुड़ना बेहद सराहनीय

लखनऊ/कानपुर नगर। सनातन संस्कृति के संरक्षण, धर्म ध्वजा की रक्षा और राष्ट्र निर्माण की दिशा में युवाओं को जोड़ने के प्रयासों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सराहा है। मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक कार्यालय में आयोजित विशेष समारोह के दौरान ‘हिंदवी स्वराज्य 369’ संगठन के संस्थापक आर्यना नंद को उनके सामाजिक एवं प्रेरणादायक कार्यों के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।

समारोह के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आर्यना नंद द्वारा सनातन संस्कृति के संवर्धन और धर्म ध्वजा की रक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि आर्यना नंद जैसे युवा अपनी जड़ों और सनातन संस्कृति से जुड़कर समाज में राष्ट्रवाद की अलख जगा रहे हैं, जो बेहद सराहनीय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन संस्कृति केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को संस्कार, सेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पण का संदेश भी देती है। युवाओं का अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ना समाज और राष्ट्र के लिए सकारात्मक संकेत है। उन्होंने ऐसे प्रयासों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

सम्मान पाकर आर्यना नंद ने जताया आभार

मुख्यमंत्री से सम्मान प्राप्त करने के बाद आर्यना नंद ने उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनके लिए व्यक्तिगत उपलब्धि से अधिक सनातन संस्कृति, सामाजिक जागरूकता और राष्ट्र सेवा के लिए किए जा रहे प्रयासों का उत्साहवर्धन है। उन्होंने संकल्प जताया कि आगे भी इसी ऊर्जा और निष्ठा के साथ समाज एवं राष्ट्रहित के कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा।

कार्यक्रम में डीजी न्यूज के संपादक भी विशेष रूप से मौजूद रहे और उन्होंने आर्यना नंद के सामाजिक एवं धार्मिक योगदान की सराहना की।

युवाओं को जोड़ने की पहल को मिली नई ऊर्जा

‘हिंदवी स्वराज्य 369’ के माध्यम से युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने और राष्ट्र निर्माण से संबंधित गतिविधियों के लिए प्रेरित करने के प्रयासों को इस सम्मान से नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री द्वारा सार्वजनिक रूप से प्रयासों की सराहना किए जाने से संगठन से जुड़े युवाओं में भी उत्साह का माहौल बना है।

यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, सामाजिक जागरूकता और राष्ट्र सेवा के लिए सक्रिय युवाओं के प्रयासों को मिली पहचान के रूप में देखा जा रहा है।

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