कायमगंज/फर्रुखाबाद कायमगंज कोतवाली क्षेत्र के कुवेरपुर गांव में बुधवार को एक दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। तीन दिन बाद घर लौटी 30 वर्षीय विवाहिता ने कथित तौर पर अपने कमरे में फंदा लगाकर जान दे दी। घटना के बाद परिवार में चीख-पुकार मच गई, जबकि गांव में शोक का माहौल है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार गांव निवासी जावेद मंसूरी की पत्नी खुशनुमा (30) पिछले तीन दिनों से घर से बाहर थीं। बुधवार को जब वह वापस घर लौटीं तो इस बात को लेकर परिवार में कहासुनी हुई। इसके कुछ समय बाद वह अपने कमरे में चली गईं। काफी देर तक बाहर न आने पर परिजनों ने देखा कि वह दुपट्टे के सहारे पंखे से लटकी हुई थीं। उन्हें नीचे उतारा गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
घटना की सूचना मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। आसपास के लोग भी मौके पर पहुंच गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, हालांकि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
सबसे मार्मिक पहलू यह है कि खुशनुमा अपने पीछे 6 वर्षीय जिकरा, 4 वर्षीय इलमा और महज 1 वर्षीय जैन को छोड़ गई हैं। तीनों मासूम अब मां के स्नेह से हमेशा के लिए वंचित हो गए। गांव में हर किसी की जुबान पर यही सवाल है कि आखिर इन नन्हे बच्चों का भविष्य अब कैसे संवर पाएगा। उनकी मासूम आंखें शायद अभी यह भी नहीं समझ पा रही होंगी कि उनकी मां अब कभी वापस नहीं आएगी।
बताया गया कि मृतका की सास गुड्डी देवी अपने बीमार भाई गयासुद्दीन को देखने फरीदपुर स्थित मायके गई थीं और बुधवार को ही वापस लौटी थीं। घर पहुंचने के कुछ ही समय बाद यह दुखद घटना सामने आ गई।
यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि पारिवारिक विवाद या तनाव चाहे जितना भी बड़ा क्यों न हो, उसका समाधान जीवन समाप्त करना नहीं हो सकता। ऐसे कठिन समय में परिवार, रिश्तेदारों और समाज का सहयोग तथा संवाद बेहद महत्वपूर्ण होता है। खासकर तब, जब छोटे-छोटे बच्चे अपने माता-पिता पर पूरी तरह निर्भर हों। उनकी परवरिश, सुरक्षा और भविष्य सबसे बड़ी जिम्मेदारी बन जाती है।


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