फर्रुखाबाद/ गंगा और रामगंगा नदियों के लगातार उफान पर रहने से जिले में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। जलस्तर बढ़ने के साथ ही जनपद के करीब 111 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। कहीं घरों में पानी घुसा है तो कहीं ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों का सहारा लेना पड़ रहा है। प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव कार्य लगातार चलाए जा रहे हैं। इसी बीच संकट की इस घड़ी में संत समाज भी बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए आगे आया है।
सदर तहसील क्षेत्र के ग्राम रामपुर ढपरपुर में उस समय ग्रामीणों के बीच राहत और उम्मीद का माहौल दिखाई दिया, जब दुर्वासा ऋषि आश्रम के महंत ब्रह्मचारी ईश्वर दास जी महाराज बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी परेशानियां सुनीं और बाढ़ के कारण सामने आ रही समस्याओं की जानकारी ली।
लंच पैकेट से लेकर बिस्किट-मिठाई तक बांटी
बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों के बीच पहुंचे महाराज ने जरूरतमंद परिवारों के लिए राहत सामग्री का वितरण कराया। इस दौरान लोगों को भोजन के लंच पैकेट, बिस्किट, मिठाई सहित अन्य खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई गई। राहत सामग्री पाकर बाढ़ से परेशान ग्रामीणों के चेहरों पर कुछ राहत दिखाई दी।
महंत ईश्वर दास महाराज ने ग्रामीणों से कहा कि आपदा की घड़ी में किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति को अकेला नहीं छोड़ा जाना चाहिए। संकट के समय पीड़ितों के साथ खड़ा होना समाज और प्रत्येक नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सेवा कार्य केवल सहायता बांटने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पीड़ितों की वास्तविक समस्याओं को समझकर उनके समाधान के लिए भी प्रयास किया जाना जरूरी है।
ग्रामीणों की समस्याएं शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का भरोसा
ग्रामीणों ने महंत को बाढ़ के कारण उत्पन्न हो रही विभिन्न समस्याओं से अवगत कराया। लोगों ने जलभराव, आवागमन, खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी सुविधाओं को लेकर अपनी परेशानियां बताईं। महाराज ने ग्रामीणों की बातें गंभीरता से सुनीं और भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं को शासन-प्रशासन के समक्ष मजबूती से रखा जाएगा तथा यथासंभव जल्द समाधान कराने का प्रयास किया जाएगा।
बाढ़ के बीच संत समाज की इस पहल को ग्रामीणों ने सराहा। लोगों का कहना था कि जब प्राकृतिक आपदा के कारण मुश्किलें बढ़ी हुई हैं, ऐसे समय में जरूरतमंदों के बीच पहुंचकर उनकी मदद करना और उनका दर्द सुनना अपने आप में बड़ी सेवा है।
फिलहाल गंगा और रामगंगा के बढ़े जलस्तर से प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीणों की मुश्किलें बनी हुई हैं। ऐसे में प्रशासनिक राहत कार्यों के साथ-साथ सामाजिक और धार्मिक संगठनों की ओर से किए जा रहे सेवा कार्य बाढ़ पीड़ित परिवारों के लिए सहारा बन रहे हैं।


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