फर्रुखाबाद/गणेश महोत्सव के समापन पर शनिवार को फर्रुखाबाद शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक आस्था और उल्लास का अद्भुत नजारा देखने को मिला। सुबह से ही गणपति बप्पा को विदाई देने की तैयारियां शुरू हो गई थीं। दोपहर बाद विभिन्न मोहल्लों से गणेश प्रतिमाओं की भव्य विसर्जन शोभायात्राएं निकलीं। डीजे, ढोल-नगाड़ों और बैंड की धुन पर श्रद्धालु नाचते-झूमते हुए आगे बढ़े। जगह-जगह उड़ते गुलाल और गूंजते ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयकारों से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया।
कटरा, बजरिया, तलैया फजल, छत्ता दलपत राय समेत शहर के विभिन्न इलाकों से गणेश प्रतिमाएं सुसज्जित वाहनों पर विराजमान कर शोभायात्राओं के रूप में पांचाल घाट की ओर रवाना की गईं। रास्ते भर श्रद्धालुओं ने गणपति की आरती और पूजा-अर्चना की। महिलाएं, बच्चे और युवा बड़ी संख्या में शोभायात्राओं में शामिल हुए।
10 फीट ऊंची मटकी फोड़कर युवाओं ने दिखाया दम
कटरा मोहल्ले से निकली शोभायात्रा में युवाओं ने खास आकर्षण पेश किया। करीब 10 फीट ऊंचाई पर बांधी गई मटकी को फोड़ने के लिए युवाओं ने उत्साह के साथ मानव पिरामिड बनाया। मटकी फूटते ही श्रद्धालुओं ने जमकर जयकारे लगाए। वहीं काली अखाड़े के सदस्यों ने विभिन्न हैरतअंगेज करतब दिखाकर लोगों को रोमांचित कर दिया। शोभायात्रा देखने के लिए सड़क के दोनों ओर लोगों की भीड़ जुटी रही।
गंगा में प्रतिमाएं विसर्जित करने के बजाय हुआ भू-विसर्जन
गंगा नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए इस बार प्रशासन की ओर से प्रतिमाओं के भू-विसर्जन की व्यवस्था की गई। पांचाल घाट किनारे जेसीबी से बड़े गड्ढे तैयार कराए गए थे। शोभायात्राओं के पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से गणपति की पूजा-अर्चना की और प्रशासन द्वारा निर्धारित स्थान पर प्रतिमाओं का भू-विसर्जन कराया गया। इस व्यवस्था के चलते गंगा में सीधे प्रतिमा विसर्जन से होने वाले प्रदूषण को रोकने का प्रयास किया गया।
सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद
गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन को लेकर पुलिस और प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। प्रमुख मार्गों और पांचाल घाट क्षेत्र में पुलिस बल की तैनाती की गई। अधिकारियों ने शोभायात्राओं की गतिविधियों पर नजर रखी और श्रद्धालुओं से शांतिपूर्ण तरीके से कार्यक्रम संपन्न कराने की अपील की। पुलिस-प्रशासन की सतर्कता के बीच गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
गणपति को विदाई देते समय श्रद्धालुओं की आंखों में भावुकता भी नजर आई। पूजा-अर्चना के बाद सभी ने एक स्वर में गणपति बप्पा से अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना की। जयकारों के बीच गणेश प्रतिमाओं को अंतिम विदाई दी गई और श्रद्धालुओं ने कहा—’गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ।’


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