छठवीं की छात्रा पायल बनीं फर्रुखाबाद की ‘डीएम साहिबा’! कुर्सी संभालते ही शुरू की जनसुनवाई, 6 फरियादियों की सुनी पीड़ा; अफसरों को दिए कार्रवाई के निर्देश

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मिशन शक्ति की अनूठी पहल से नन्हीं बेटी में दिखा प्रशासनिक नेतृत्व, डीएम डॉ. अंकुर लाठर ने पौधा भेंट कर बढ़ाया हौसला

फर्रुखाबाद। उम्र महज छठवीं कक्षा में पढ़ने की, लेकिन जिम्मेदारी जिले के सबसे बड़े प्रशासनिक पद की! फर्रुखाबाद में मिशन शक्ति अभियान के तहत उस समय एक अनूठी तस्वीर सामने आई, जब उच्च प्राथमिक विद्यालय पिपरगांव की छात्रा पायल दीक्षित को एक दिन के लिए प्रतीकात्मक जिलाधिकारी बनाया गया। डीएम की कुर्सी पर बैठते ही पायल ने प्रशासनिक कार्यशैली का परिचय देते हुए जनसुनवाई की कमान संभाली। उनके सामने अपनी फरियाद लेकर पहुंचे छह लोगों ने विभिन्न समस्याएं रखीं। छात्रा ने सभी की शिकायतें गंभीरता से सुनीं और संबंधित अधिकारियों को जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इस पहल ने न केवल बालिकाओं की नेतृत्व क्षमता को सामने लाने का काम किया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि अवसर मिले तो छोटी उम्र में भी बड़ी जिम्मेदारियों को समझा और निभाया जा सकता है।

डीएम की कुर्सी पर बैठीं पायल, फरियादियों की समस्याओं पर लिया संज्ञान

मंगलवार को जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर के निर्देश पर आयोजित इस विशेष पहल के दौरान पायल दीक्षित का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया गया। इसके बाद सुबह करीब 11:30 बजे उन्होंने प्रतीकात्मक जिलाधिकारी के रूप में जनसुनवाई शुरू की। एक-एक कर छह फरियादी अपनी शिकायतें लेकर पहुंचे। पायल ने उनकी बातें ध्यानपूर्वक सुनीं और समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।

इस दौरान छात्रा ने प्रशासनिक व्यवस्था को करीब से समझा। उन्होंने जाना कि आम नागरिक अपनी समस्याएं लेकर अधिकारियों तक कैसे पहुंचते हैं और शिकायतों के निस्तारण के लिए किस प्रकार संबंधित विभागों से कार्रवाई कराई जाती है। एक दिन के इस अनुभव ने पायल को प्रशासनिक जिम्मेदारियों, जनसेवा और निर्णय लेने की प्रक्रिया से रूबरू कराया।

कहीं जमीन पर कब्जा तो कहीं अतिक्रमण, आवास की समस्या भी पहुंची

जनसुनवाई में सामने आई शिकायतें आम लोगों की रोजमर्रा की परेशानियों से जुड़ी थीं। किसी ने जमीन पर कब्जे की समस्या बताई तो किसी ने अतिक्रमण और जाम से निजात दिलाने की मांग रखी। सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण तथा आवास नहीं मिलने जैसी शिकायतें भी सामने आईं।

पायल दीक्षित ने फरियादियों की समस्याएं सुनने के बाद संबंधित अधिकारियों को मामलों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए। शिकायतों के निस्तारण के लिए संबंधित उप जिलाधिकारियों, नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी, नगर मजिस्ट्रेट और मुख्य विकास अधिकारी को आवश्यक कदम उठाने के लिए कहा गया।

इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य छात्रा को यह समझाना था कि प्रशासन का काम केवल आदेश जारी करना नहीं, बल्कि आम जनता की समस्याओं को सुनना, उनकी वास्तविक स्थिति की जानकारी जुटाना और नियमानुसार समाधान की दिशा में प्रयास करना भी है।

डीएम डॉ. अंकुर लाठर ने पौधा देकर किया सम्मानित

जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने पायल दीक्षित को पौधा भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान बालिकाओं के सशक्तिकरण, शिक्षा और नेतृत्व क्षमता को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया।

डीएम की इस पहल ने पायल का उत्साह बढ़ाया। पौधा भेंट करने के माध्यम से उन्हें आगे बढ़ने, अपनी प्रतिभा निखारने और जीवन में बड़े लक्ष्य निर्धारित करने का संदेश भी दिया गया। प्रशासन की इस गतिविधि ने बालिकाओं को सम्मान, प्रोत्साहन और अवसर देने के महत्व को रेखांकित किया।

मिशन शक्ति से बेटियों को मिल रहा आगे बढ़ने का संदेश

मिशन शक्ति अभियान का उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान, स्वावलंबन तथा अधिकारों के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना है। इसी क्रम में बालिकाओं को प्रशासनिक जिम्मेदारियों से परिचित कराने जैसी पहल उनके आत्मविश्वास को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

जब बालिकाओं को निर्णय लेने, अपनी बात रखने और जिम्मेदारियों को समझने का अवसर मिलता है, तो उनके भीतर नेतृत्व करने की क्षमता विकसित होती है। साथ ही वे समाज और प्रशासन में अपनी भूमिका को लेकर अधिक जागरूक बनती हैं।

छोटी उम्र में बड़ी जिम्मेदारी का अनुभव

छठवीं कक्षा की छात्रा पायल दीक्षित के लिए एक दिन की प्रतीकात्मक जिलाधिकारी बनने का अनुभव निश्चित रूप से यादगार रहा। जनसुनवाई के दौरान उन्होंने देखा कि किस तरह अधिकारी फरियादियों की बातें सुनते हैं, शिकायतों को संबंधित विभागों तक पहुंचाते हैं और उनके समाधान के लिए कार्रवाई के निर्देश देते हैं।

फर्रुखाबाद में आयोजित यह पहल बालिकाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने के लिए प्रेरित करने वाला कदम है। पायल का एक दिन के लिए डीएम बनना इस बात का प्रतीक बना कि बेटियों को सही अवसर, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिले तो वे भविष्य में प्रशासनिक सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बना सकती हैं।

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