छोटी उम्र, बड़ा सपना! कक्षा 7 की छात्रा गौरी ने संभाली खंड शिक्षा अधिकारी की कुर्सी, मिशन शक्ति से बेटियों को मिला हौसलों का आसमान

1 min read

मोहम्मदाबाद में अनोखी पहल से छात्राओं में जगा नेतृत्व का जज्बा, एक दिन की अधिकारी बनकर गौरी ने पेश की आत्मविश्वास की मिसाल

मोहम्मदाबाद (फर्रुखाबाद)। बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने और उनके भीतर नेतृत्व क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे मिशन शक्ति अभियान के तहत मोहम्मदाबाद में एक प्रेरणादायक पहल देखने को मिली। कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय, मोहम्मदाबाद की कक्षा सात की होनहार छात्रा कुमारी गौरी को एक दिन के लिए खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) का पदभार सौंपा गया। अधिकारी की कुर्सी पर बैठकर गौरी ने न केवल अपने आत्मविश्वास का परिचय दिया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि बेटियों को अवसर और प्रोत्साहन मिले तो वे हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकती हैं।

मिशन शक्ति अभियान के अंतर्गत आयोजित इस पहल का उद्देश्य बालिकाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना, उनमें आत्मविश्वास बढ़ाना और भविष्य में बड़ी जिम्मेदारियां निभाने के लिए प्रेरित करना है। एक दिन की खंड शिक्षा अधिकारी बनने का अवसर मिलने पर गौरी के चेहरे पर उत्साह और आत्मविश्वास साफ नजर आया। उन्होंने अधिकारी की भूमिका को समझते हुए विभागीय कार्यों की जानकारी ली और जिम्मेदारियों को करीब से जाना।

अधिकारी की कुर्सी पर बैठकर जाना कामकाज

कक्षा सात में पढ़ने वाली गौरी के लिए यह अनुभव किसी सपने के सच होने से कम नहीं था। आमतौर पर जिस पद पर बैठकर अधिकारी शिक्षा व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों की निगरानी करते हैं, उसी पद की जिम्मेदारी को एक दिन के लिए समझने का अवसर गौरी को मिला। इस पहल के माध्यम से छात्राओं को यह जानने का मौका मिला कि प्रशासनिक पदों पर किस प्रकार जिम्मेदारियों का निर्वहन किया जाता है और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में अधिकारियों की क्या भूमिका होती है।

इस तरह की गतिविधियां विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखतीं, बल्कि उन्हें व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान करती हैं। साथ ही, बच्चों के मन में भविष्य को लेकर नए सपने देखने और उन्हें पूरा करने का संकल्प लेने की प्रेरणा पैदा करती हैं।

बेटियों को आगे बढ़ाने की दिशा में प्रेरणादायक कदम

मिशन शक्ति का उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं को सशक्त बनाने के साथ उन्हें समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाने के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है। गौरी को एक दिन की खंड शिक्षा अधिकारी बनाए जाने की पहल इसी सोच को आगे बढ़ाती नजर आई। इससे छात्राओं को यह संदेश मिला कि नेतृत्व, निर्णय लेने की क्षमता और प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाने का अवसर बेटियों को भी मिलना चाहिए।

समाज में आज भी कई बालिकाएं संसाधनों और अवसरों की कमी के कारण अपने सपनों को पूरा करने से पीछे रह जाती हैं। ऐसे में विद्यालय स्तर पर होने वाली इस तरह की पहल उनके भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानने और उसे निखारने का माध्यम बन सकती है।

छोटी-सी पहल, बड़े बदलाव की उम्मीद

गौरी का एक दिन के लिए खंड शिक्षा अधिकारी बनना केवल एक औपचारिक गतिविधि नहीं, बल्कि बालिकाओं को उनके उज्ज्वल भविष्य के प्रति प्रेरित करने का प्रयास है। इससे यह संदेश मिलता है कि बेटियों को आगे बढ़ने के लिए सही दिशा, प्रोत्साहन और अवसर देना जरूरी है। जब उन्हें अपनी क्षमता दिखाने का मंच मिलता है, तो वे आत्मविश्वास के साथ नई ऊंचाइयों को छूने की राह पर आगे बढ़ सकती हैं।

गौरी की यह प्रेरणादायक पहल बेटियों के सपनों, उनके आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को नई उड़ान देने का संदेश देती है। सच है, बेटियां केवल सपने देखने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें हकीकत में बदलने का हौसला भी रखती हैं।

संदेश: बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ—बेटियों को अवसर दो, उन्हें नेतृत्व करने दो।

You May Also Like

More From Author

+ There are no comments

Add yours