लाइसेंस की शर्तों के उल्लंघन पर तीन स्टोर संचालकों को नोटिस की तैयारी, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड भी खंगाले
फर्रुखाबाद। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ने मंगलवार को शहर के निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के अंदर संचालित मेडिकल स्टोरों पर अचानक छापेमारी कर जांच की। कार्रवाई के दौरान तीन अलग-अलग मेडिकल स्टोरों से आठ दवाओं के नमूने लिए गए। टीम ने दवाओं की बिक्री से संबंधित अभिलेखों की भी गहनता से पड़ताल की। जांच में लाइसेंस की निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किए जाने की स्थिति सामने आने पर विभाग ने तीनों संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।
औषधि विभाग की अचानक हुई कार्रवाई से अस्पतालों और मेडिकल स्टोर संचालकों में खलबली मच गई। टीम ने सबसे पहले आवास विकास तिराहा स्थित माया हॉस्पिटल के निदानिका मेडिकल स्टोर की जांच की। यहां से अलग-अलग दवाओं के चार नमूने लिए गए। इसके बाद टीम ने बढ़पुर स्थित फर्रुखाबाद सिटी हॉस्पिटल के सियोवोल इंटरप्राइजेज पर पहुंचकर जांच की और दो दवाओं के नमूने लिए।
इसी क्रम में आवास विकास कॉलोनी स्थित आरके हॉस्पिटल के मेडिकल स्टोर की भी जांच की गई। यहां से टीम ने दो दवाओं के नमूने संकलित किए। इस तरह तीनों मेडिकल स्टोरों से कुल आठ दवाओं के नमूने लिए गए हैं, जिन्हें सरकारी जांच प्रयोगशाला भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड भी खंगाले
छापेमारी के दौरान टीम ने केवल दवाओं के नमूने लेने तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी, बल्कि मेडिकल स्टोरों के खरीद और बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड भी जांचे। दवाओं की उपलब्धता, बिक्री और लाइसेंस की शर्तों से संबंधित अभिलेखों का मिलान किया गया। विभागीय टीम ने मेडिकल स्टोरों के संचालन से जुड़े दस्तावेजों को भी बारीकी से देखा।
तीनों संचालकों पर कार्रवाई की तैयारी
औषधि निरीक्षक स्वागतिका घोष के अनुसार, जांच के दौरान लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन पाए जाने के मामले में तीनों मेडिकल स्टोर संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी करने की सिफारिश सहायक आयुक्त (औषधि), कानपुर मंडल को भेजी गई है। नमूनों को सरकारी प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जा रहा है।
अब विभाग की नजर जांच रिपोर्ट पर है। प्रयोगशाला से दवाओं की गुणवत्ता संबंधी रिपोर्ट आने के बाद दवा एवं प्रसाधन सामग्री कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। रिपोर्ट में यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित मेडिकल स्टोर संचालकों के खिलाफ विभागीय स्तर पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है।


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