कपड़े लेने छत पर गई थी 16 वर्षीय पलक, बंदरों का झुंड देखकर घबराई; भागते समय बिगड़ा संतुलन, सिर के बल गिरी
फर्रुखाबाद/ शहर के नरकसा मोहल्ले में बंदरों के आतंक ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। दोपहर बंदरों के झुंड से बचने की कोशिश में कक्षा नौ की 16 वर्षीय छात्रा पलक चौहान छत से नीचे गिर गई। गंभीर चोट लगने के बाद परिजन उसे तत्काल अस्पताल लेकर दौड़े, लेकिन रास्ते में ही उसकी हालत बिगड़ गई। लोहिया अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। स्थानीय रिपोर्टों में भी घटना की पुष्टि हुई है।
स्कूल से लौटकर कपड़े लेने गई थी छत पर
कादरीगेट थाना क्षेत्र के नरकसा मोहल्ला निवासी पूर्व सैनिक सुनील कुमार चौहान की बेटी पलक कक्षा नौ में पढ़ती थी। स्कूल से घर लौटने के बाद वह छत पर सूख रहे कपड़े लेने गई थी। इसी दौरान अचानक बंदरों का झुंड उसकी ओर बढ़ आया।
बताया गया कि बंदरों को अपनी तरफ आते देख छात्रा घबरा गई और उनसे बचने के लिए भागने लगी। इसी दौरान उसका संतुलन बिगड़ गया और वह ऊंचाई से नीचे गली में जा गिरी। सिर में गंभीर चोट लगने से उसकी हालत बेहद नाजुक हो गई।
अस्पताल पहुंचने से पहले ही टूट गई जिंदगी की डोर
हादसे की जानकारी मिलते ही परिजन आनन-फानन में पलक को लेकर लोहिया अस्पताल रवाना हुए, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
बेटी की मौत की खबर मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। जिस बेटी के घर लौटने का इंतजार था, उसकी अचानक मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी थी पलक
बताया गया कि पलक चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी थी। परिवार के लिए उसकी मौत किसी बड़े आघात से कम नहीं है। मोहल्ले में भी घटना की खबर फैलते ही शोक का माहौल बन गया।
बंदरों के आतंक पर कब जागेगा प्रशासन?
घटना ने शहर के रिहायशी इलाकों में बढ़ती बंदरों की समस्या पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बंदरों के झुंड आए दिन छतों और गलियों में पहुंच जाते हैं, जिससे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों में डर बना रहता है। कुछ दिन पहले भी जिले में बंदरों की समस्या को लेकर कार्रवाई की मांग उठ चुकी है।
डीएम डॉ. अंकुर लाठर से तत्काल संज्ञान लेने की मांग
पलक की दर्दनाक मौत के बाद अब लोगों ने जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर से मामले का तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। लोगों की मांग है कि नगर पालिका और संबंधित विभागों को निर्देश देकर नरकसा समेत शहर के उन इलाकों में बंदर पकड़ने का विशेष अभियान चलाया जाए, जहां बंदरों के झुंड लगातार लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं।
गौरतलब है कि हाल में जिलाधिकारी के समक्ष बंदरों की समस्या उठाए जाने पर संबंधित अधिकारियों को बंदरों को पकड़कर वन क्षेत्र में छोड़ने तथा समस्या का व्यवहारिक और प्रभावी समाधान तलाशने के निर्देश दिए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी।
अब सवाल यह है कि एक मासूम छात्रा की जान जाने के बाद क्या जिम्मेदार विभाग रिहायशी इलाकों से बंदरों के आतंक को खत्म करने के लिए ठोस अभियान चलाएंगे?


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