पक्के मकानों वालों को आवास मिलने के आरोप, जरूरतमंद ने लगाया रुपये मांगने का आरोप—अधिकारी बोले, झोपड़ी में रहने वालों को ही मिलेगा लाभ
फर्रुखाबाद/अमृतपुर। लगातार दो दिनों से हो रही बारिश ने गरीब परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अमृतपुर थाना क्षेत्र के कुबेरपुर गांव के कुम्हरौर में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक गरीब मजदूर की झोपड़ी के ऊपर अचानक नीम का पेड़ भरभराकर गिर पड़ा। हादसे के समय झोपड़ी में परिवार के सदस्य मौजूद थे, लेकिन गनीमत रही कि किसी की जान नहीं गई। पेड़ गिरने से झोपड़ी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और परिवार के सामने सिर छिपाने का संकट खड़ा हो गया।
पीड़ित मजदूर कन्हैया लाल पुत्र बाबूराम ने बताया कि वह अपनी पत्नी और आठ बच्चों के साथ लंबे समय से इसी झोपड़ी में रहकर गुजर-बसर कर रहे हैं। मजदूरी करके किसी तरह परिवार का पेट पालने वाले कन्हैया लाल का कहना है कि कई बार अधिकारियों और जिम्मेदारों के चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका।
झोपड़ी में गरीब, फिर भी आवास से दूर!
कन्हैया लाल ने आरोप लगाया कि गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना की पात्रता को लेकर पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। उनका दावा है कि कुछ ऐसे लोगों को भी आवास योजना का लाभ मिल रहा है, जिनके पास पहले से पक्के मकान हैं, जबकि वास्तविक जरूरतमंद परिवार आज भी कच्ची झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं।
पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि आवास योजना का लाभ दिलाने के नाम पर जरूरतमंदों से रुपये मांगे जाते हैं। उसने सरकारी शौचालय योजना में भी पैसे लिए जाने का आरोप लगाया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
पेड़ गिरने के बाद सामने आई व्यवस्था की हकीकत
बारिश के बीच झोपड़ी पर पेड़ गिरने की घटना ने ग्रामीण आवास व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में कई गरीब परिवार आज भी कच्चे मकानों और झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं। उनका आरोप है कि योजनाओं का लाभ दिलाने में बिचौलियों और जिम्मेदारों की भूमिका की जांच होनी चाहिए।
बीडीओ बोले—पात्रता में नहीं होगी मनमानी
मामले में खंड विकास अधिकारी सुनील कुमार जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ पात्र लोगों को ही दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग वास्तव में झोपड़ी में रह रहे हैं, उनकी पात्रता के अनुसार आवास योजना का लाभ दिलाया जाएगा। यदि किसी आवेदक के पास एक भी पक्का कमरा पाया जाता है तो नियमानुसार उसका आवेदन निरस्त किया जा सकता है।
अब देखना यह है कि पेड़ गिरने से बेघर होने की कगार पर पहुंचे कन्हैया लाल के परिवार की प्रशासन कब सुध लेता है और आवास योजना के लाभ के लिए पात्रता की जांच कब होती है। साथ ही ग्रामीणों द्वारा लगाए गए वसूली के आरोपों की जांच होती है या नहीं, यह भी आने वाले दिनों में साफ होगा।


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