चूल्हे से बाजार तक पहुंचा हुनर, 10 महिलाओं ने खड़ा किया अपना मसाला ब्रांड

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पसियापुर की महिलाओं ने मेहनत से रचा आत्मनिर्भरता का नया अध्याय, ‘पांचाल प्रीमियम स्पाइसेस’ की सरकारी स्कूलों तक पहुंच

फर्रुखाबाद। शमसाबाद ब्लॉक के पसियापुर गांव की महिलाओं ने मेहनत, हुनर और हौसले की बदौलत आत्मनिर्भरता की ऐसी मिसाल पेश की है, जो ग्रामीण क्षेत्र की दूसरी महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही है। मां गायत्री महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी 10 महिलाओं ने मिलकर अपना मसाला ब्रांड ‘पांचाल प्रीमियम स्पाइसेस’ तैयार किया है। गांव में तैयार हो रहे इन मसालों ने अब बाजार के साथ-साथ सरकारी स्कूलों के मध्यान्ह भोजन तक अपनी पहुंच बना ली है।

मां गायत्री महिला स्वयं सहायता समूह का गठन वर्ष 2023 में किया गया था। समूह से कुल 10 महिलाएं जुड़ी हैं, जिनमें छह महिलाएं नियमित रूप से मसाला तैयार करने, पैकिंग और सप्लाई के काम में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। समूह की प्रमुख सदस्यों में दीक्षा सिंह भी शामिल हैं।

चार मसालों से शुरू किया कारोबार

महिलाओं ने शुरुआत में हल्दी, लाल मिर्च, धनिया और गरम मसाला तैयार करना शुरू किया। अपने उत्पाद को बाजार में अलग पहचान दिलाने के लिए महिलाओं ने ‘पांचाल प्रीमियम स्पाइसेस’ नाम से ब्रांड तैयार किया। इसके बाद मसालों की पैकिंग और बिक्री का काम आगे बढ़ाया गया।

खास बात यह है कि समूह के मसाला ब्रांड को एफएसएसएआई की मंजूरी भी प्राप्त है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसका रजिस्ट्रेशन नंबर 22726306000502 है, जिसकी वैधता वर्ष 2029 तक बताई गई है।

सरकारी स्कूलों के भोजन तक पहुंचा ग्रामीण महिलाओं का उत्पाद

महिलाओं के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है कि उनके तैयार किए जा रहे मसालों की सप्लाई अब सरकारी स्कूलों के मध्यान्ह भोजन (एमडीएम) में भी की जा रही है। इससे महिलाओं को अपने उत्पाद के लिए बाजार मिलने के साथ काम का नियमित अवसर भी मिल रहा है।

गांव में ही रोजगार, बढ़ा आत्मविश्वास

इस पहल ने महिलाओं को घर और गांव के आसपास ही रोजगार का अवसर उपलब्ध कराया है। मसाले तैयार करने से लेकर उनकी पैकिंग और सप्लाई तक महिलाएं खुद काम में जुटी हैं। इससे उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत होने के साथ अपने हुनर को पहचान दिलाने का अवसर भी मिला है।

ब्रांड के नाम में भी स्थानीय पहचान की झलक दिखाई देती है। ‘पांचाल प्रीमियम स्पाइसेस’ नाम क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान से प्रेरित बताया जाता है। महिलाओं का यह प्रयास बताता है कि यदि ग्रामीण हुनर को सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध हो तो गांव की महिलाएं भी अपने उत्पाद को ब्रांड के रूप में स्थापित कर सकती हैं।

पसियापुर की इन महिलाओं की कहानी केवल मसाले तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भरता, मेहनत और बदलती ग्रामीण महिला शक्ति की कहानी है। उनका प्रयास यह संदेश दे रहा है कि रोजगार की तलाश में गांव छोड़ने के बजाय गांव में ही अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

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