हमले की शिकायत के बाद भी खामोश रही पुलिस? न्यायालय कर्मचारी की मौत पर कलेक्ट्रेट में फूटा आक्रोश

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27 सितंबर की घटना के बाद नहीं हुई एफआईआर, बिगड़ी हालत तो रास्ते में टूट गई अमित की सांसें; परिजनों-कर्मचारियों ने कलेक्ट्रेट गेट पर दिया धरना

फर्रुखाबाद। न्यायालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर तैनात 36 वर्षीय अमित मिश्रा सुबह अचानक मौत के बाद मामला तूल पकड़ गया। परिजनों ने 27 सितंबर की रात उनके साथ हुई कथित घटना को लेकर पुलिस पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। परिवार का कहना है कि घटना के बाद डायल-112 पर सूचना देने और थाने में शिकायत किए जाने के बावजूद समय रहते मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। अमित की मौत के बाद परिजनों के साथ न्यायालय कर्मचारियों का आक्रोश भी खुलकर सामने आया और शाम कलेक्ट्रेट गेट पर धरना शुरू कर दिया गया।

परिजनों के अनुसार सुबह अमित के सीने में अचानक तेज दर्द उठा। हालत बिगड़ने पर उन्हें इलाज के लिए लोहिया अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शव को लोहिया अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया गया।

मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों ने मोर्चरी में शव रखने को लेकर विरोध जताया और हंगामा किया। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाकर शांत कराया। पुलिस की ओर से मोर्चरी का ताला तोड़ने के प्रयास की बात भी सामने आई है।

27 सितंबर की रात आखिर अमित के साथ क्या हुआ था?

अमित के भाई आलोक मिश्रा का आरोप है कि 27 सितंबर की रात करीब साढ़े आठ बजे अमित बाइक से अपने घर लौट रहे थे। गांव से लगभग एक किलोमीटर पहले तीन बाइक सवार लोगों ने उनकी बाइक को गिरा दिया। आरोप है कि अमित किसी तरह मौके से भागे तो बाइक सवारों ने उनका पीछा भी किया। बाद में आरोपी वहां से चले गए।

परिवार का कहना है कि घटना की सूचना तत्काल डायल-112 पर दी गई थी। पुलिस मौके पर पहुंची और अमित का मेडिकल भी कराया गया। परिजनों के मुताबिक पुलिस ने चार मोबाइल नंबरों की सीडीआर निकलवाकर जांच करने तथा कार्रवाई का भरोसा दिया था। लेकिन आरोप है कि शिकायत के बावजूद तत्काल एफआईआर दर्ज नहीं की गई।

परिवार का दावा है कि घटना के बाद अमित काफी परेशान थे। ऐसे में मंगलवार को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने और मौत हो जाने से कई सवाल खड़े हो गए हैं।

मौत के बाद कलेक्ट्रेट पहुंचे परिजन, कर्मचारियों ने भी संभाला मोर्चा

अमित की मौत के बाद परिवार के लोग पुलिस कार्रवाई की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। शाम करीब पांच बजे न्यायालय के कर्मचारी भी बड़ी संख्या में परिजनों के समर्थन में कलेक्ट्रेट गेट के बाहर धरने पर बैठ गए।

धरने पर कर्मचारियों ने राजेपुर थानाध्यक्ष और हल्का प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष ऋषि यादव ने कहा कि अमित न्यायालय के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे और 27 सितंबर को उनके साथ गंभीर घटना हुई थी। कर्मचारियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

धरने के दौरान कलेक्ट्रेट गेट पर काफी देर तक गहमागहमी का माहौल रहा। कर्मचारी और परिजन पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते रहे। मंगलवार रात करीब दस बजे तक धरना जारी रहने की बात सामने आई।

देर रात दर्ज हुई एफआईआर, अब जांच पर टिकी निगाहें

मामला गरमाने के बाद पुलिस ने 27 सितंबर को दी गई शिकायत के आधार पर मंगलवार रात करीब आठ बजे अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की। शिकायत में बाइक गिराने, पीछा करने और हमला करने की कोशिश किए जाने का आरोप लगाया गया है।

परिजनों का कहना है कि यदि शिकायत मिलने के बाद ही पुलिस ने प्रभावी कार्रवाई की होती तो शायद स्थिति अलग होती। अमित के भाई आलोक मिश्रा ने आरोप लगाया कि समय रहते पुलिस कार्रवाई न होने के कारण उनका परिवार लगातार परेशान रहा।

हालांकि अमित की मौत की वास्तविक वजह क्या है, यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। उन्हें सीने में दर्द हुआ था और अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हुई। मौत का कारण हार्ट अटैक है अथवा कोई अन्य वजह, इसका अंतिम निष्कर्ष पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

अमित मिश्रा की मौत से पत्नी रोली मिश्रा, मां रामा मिश्रा समेत परिवार के अन्य सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। एक ओर परिवार अपने जवान सदस्य की मौत से सदमे में है, वहीं दूसरी ओर 27 सितंबर की घटना को लेकर पुलिस कार्रवाई में देरी के आरोप ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

अमृतपुर सीओ राजेश द्विवेदी ने बताया कि उच्च अधिकारियों के निर्देशन में पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। जांच के बाद रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी।

अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि 27 सितंबर की रात अमित के साथ हुई घटना की वास्तविकता क्या थी, शिकायत के बाद पुलिस स्तर पर क्या कार्रवाई की गई और अमित की मौत का वास्तविक कारण क्या रहा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।

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