फर्रुखाबाद, पांचाल घाट।
जनपद में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बारिश के कारण गंगा उफान पर है और नदी खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंच चुकी है। ऐसे समय में पांचाल घाट गंगा पुल पर एक बेहद चिंताजनक और लापरवाही भरा नजारा देखने को मिल रहा है। कुछ किशोर अपनी जान की परवाह किए बिना पुल से उफनती गंगा में छलांग लगाकर सिक्के निकालने का जानलेवा खेल खेल रहे हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि यह सब खुलेआम हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की मौजूदगी कहीं दिखाई नहीं दे रही।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पुल से गुजरने वाले श्रद्धालु और वाहन चालक आस्था के चलते गंगा में एक, दो, पांच और दस रुपये के सिक्के फेंकते हैं। इन्हीं सिक्कों को निकालने के लालच में किशोर पुल की रेलिंग और जाली पर चढ़ जाते हैं और लगभग दस फीट की ऊंचाई से तेज बहाव वाली गंगा में छलांग लगा देते हैं। बताया जाता है कि इनमें अधिकांश बच्चे नाविक या नदी किनारे रहने वाले परिवारों से जुड़े हैं और यह जोखिम भरा काम लंबे समय से करते आ रहे हैं।
घाट पर मौजूद लोगों का कहना है कि यह कोई एक दिन की घटना नहीं है, बल्कि आए दिन ऐसा नजारा देखने को मिलता है। कई लोग इन बच्चों को रोकने की बजाय मोबाइल से वीडियो बनाते रहते हैं। कुछ लोग तालियां बजाकर उनका उत्साह बढ़ाते हैं, जबकि कुछ समझाने की कोशिश भी करते हैं, लेकिन कोई स्थायी व्यवस्था नहीं होने के कारण यह खतरनाक सिलसिला लगातार जारी है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और प्रशासन बाढ़ को लेकर अलर्ट जारी कर रहा है, तब पुल पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए? यदि किसी किशोर का पैर फिसल जाए या तेज बहाव में वह बह जाए तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की ओर से समय-समय पर चेतावनी दिए जाने की बातें जरूर कही जाती हैं, लेकिन धरातल पर कोई प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं देती। यदि पुल पर नियमित पुलिस गश्त, निगरानी और बैरिकेडिंग की व्यवस्था हो तो इस तरह की घटनाओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।
इस संबंध में कादरी गेट थाना प्रभारी कपिल चौधरी का कहना है कि पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया है और उफनती गंगा में छलांग लगाने जैसी खतरनाक गतिविधियों को रोकने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल चेतावनी देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि मौके पर लगातार निगरानी और सख्त कार्रवाई की जरूरत है।
फिलहाल पांचाल घाट पर मौत को चुनौती देता यह खतरनाक खेल प्रशासन और पुलिस की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर रहा है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए और कोई बड़ा हादसा हो गया, तो उसकी जिम्मेदारी तय करना भी प्रशासन के लिए आसान नहीं होगा।


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