गंगा का जलस्तर घटा तो कटान ने मचाई तबाही, देखते ही देखते गंगा में समा गईं झोपड़ियां!

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बाढ़ के बाद अब आशियाना बचाने की जद्दोजहद, सड़क किनारे तिरपाल तले परिवार गुजार रहे दिन-रात; कई मकानों पर मंडरा रहा खतरा

अमृतपुर/ फर्रुखाबाद/गंगा के जलस्तर में भले ही कमी आनी शुरू हो गई हो, लेकिन नदी किनारे बसे ग्रामीणों की मुसीबत कम होने के बजाय और बढ़ गई है। पानी घटते ही गंगा का कटान तेज हो गया है। करनपुर घाट क्षेत्र के मंझा की मड़ैया समेत आसपास के गांवों में कटान की चपेट में आकर कई झोपड़ियां नदी में समा चुकी हैं। लगातार कट रहे किनारे को देखकर ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। लोगों को अब डर सताने लगा है कि कहीं उनका आशियाना भी अगला निशाना न बन जाए।

करनपुर घाट क्षेत्र में गंगा के तेज कटान ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खुशीराम की झोपड़ी कटान की चपेट में आकर गंगा में समा गई। घर उजड़ने के बाद परिवार के सामने रहने का संकट खड़ा हो गया। मजबूरी में परिवार सड़क किनारे तिरपाल डालकर रहने को विवश है। इसी तरह शिवाकांत की दो झोपड़ियां भी गंगा की धारा में समा चुकी हैं। मंझा की मड़ैया में भी कई झोपड़ियां कटान का शिकार हो चुकी हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि पहले बाढ़ के पानी ने खेतों में खड़ी फसलों को बर्बाद किया और अब पानी उतरने के साथ तेज कटान ने घर-गृहस्थी पर संकट खड़ा कर दिया है। नदी लगातार किनारे की जमीन को काट रही है। कई स्थानों पर कटान मकानों के बेहद करीब पहुंच गया है। ऐसे में ग्रामीण अपने घरों और सामान को बचाने की कोशिश में जुटे हैं।

फसल चौपट होने के बाद आशियाना भी खतरे में आने से ग्रामीणों की चिंता दोगुनी हो गई है। दिन में लोग नदी के किनारे कटान का मंजर देखते हैं तो रात में परिवार और घर की सुरक्षा को लेकर नींद उड़ जाती है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि कटान इसी तरह जारी रहा तो आने वाले दिनों में कई और घर इसकी जद में आ सकते हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि अधिकारियों की टीम तत्काल मौके पर भेजकर कटान की स्थिति का जायजा ले। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने के साथ ही तिरपाल, भोजन और अन्य जरूरी राहत सामग्री मुहैया कराई जाए। इसके अलावा गंगा के कटान को रोकने के लिए स्थायी और प्रभावी इंतजाम किए जाएं, ताकि हर साल बाढ़ और कटान के बाद ग्रामीणों को अपना आशियाना बचाने के लिए संघर्ष न करना पड़े।

अब सवाल यह है कि गंगा का पानी उतरने के बाद तेज हो रहे कटान पर प्रशासन कब गंभीरता से कदम उठाएगा और उजड़ने की कगार पर खड़े परिवारों को कब सुरक्षित ठिकाना मिलेगा?

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