फर्रुखाबाद/अमृतपुर /करनपुर घाट गांव में सरकारी आवास योजना का लाभ न मिलने का आरोप लगाते हुए एक महिला ने जिम्मेदार अधिकारियों से मदद की गुहार लगाई है। गांव निवासी प्रियंका पत्नी वीरपाल का कहना है कि वह पिछले कई वर्षों से अपने चार बच्चों के साथ झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं। परिवार के लिए यही झोपड़ी रसोई भी है और रहने की जगह भी। पक्की छत के अभाव में बच्चों समेत पूरा परिवार इसी कच्चे आशियाने में रात गुजार रहा है।
महिला के मुताबिक आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वह खुद पक्का मकान बनवाने में सक्षम नहीं हैं। उन्हें उम्मीद थी कि सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना अथवा मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत परिवार को पक्का मकान मिल जाएगा, लेकिन वर्षों गुजरने के बाद भी उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल सका।
प्रियंका का आरोप है कि ग्राम प्रधान की ओर से भी उनकी समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस सहायता नहीं मिली। उनका कहना है कि कई बार सरकारी आवास मिलने की उम्मीद जगी, लेकिन आज तक पक्की छत नसीब नहीं हुई।
बारिश और बाढ़ के दौरान बढ़ जाती है परेशानी
करनपुर घाट क्षेत्र में बारिश और बाढ़ के मौसम में झोपड़ी में रहने वाले परिवार की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। पानी और नमी के बीच बच्चों के साथ झोपड़ी में रहना परिवार के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। तेज बारिश में झोपड़ी की सुरक्षा को लेकर भी परिवार चिंतित रहता है।
महिला का कहना है कि बच्चों के सिर पर सुरक्षित छत हो, यही उसकी सबसे बड़ी इच्छा है। सरकारी योजनाओं का उद्देश्य भी गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराना है, ऐसे में वह चाहती हैं कि उनके मामले की निष्पक्ष जांच कर पात्रता के आधार पर उन्हें आवास योजना का लाभ दिलाया जाए।
अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस परिवार की स्थिति का संज्ञान लेकर मौके पर जांच कराते हैं या फिर सरकारी आवास की आस में परिवार को झोपड़ी में ही जिंदगी गुजारनी पड़ेगी। प्रियंका ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई कर पक्के आवास की सुविधा दिलाने की मांग की है।


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