पांचाल घाट/फर्रुखाबाद
धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र और जनपद की पहचान माने जाने वाले पांचाल घाट पर इन दिनों गंगा की पवित्रता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक ओर पर्यटन विभाग लाखों रुपये खर्च कर घाटों का सौंदर्यीकरण और विकास कार्य करा रहा है, वहीं दूसरी ओर घाट के ऊपर बसे क्षेत्रों से निकलने वाला गंदा पानी और कथित रूप से शौचालयों का दूषित जल सीधे गंगा में पहुंच रहा है। इससे न केवल गंगा का जल प्रदूषित हो रहा है, बल्कि यहां आने वाले हजारों श्रद्धालुओं, साधु-संतों और पंडा समाज को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
घाट पर मौजूद लोगों का कहना है कि ऊपरी आबादी वाले क्षेत्र में जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण घरों का गंदा पानी सीधे गंगा की ओर बहता है। बरसात के दिनों में यह समस्या और विकराल हो जाती है। गंदे पानी के साथ मिट्टी और कचरा भी घाट तक पहुंच जाता है, जिससे घाट की सीढ़ियां और आसपास का क्षेत्र गंदगी से भर जाता है।
घाट पर वर्षों से पूजा-पाठ और प्रसाद विक्रय का कार्य कर रहे पंडा बहोरन लाल ने बताया कि गंगा में लगातार गंदा पानी गिरने से श्रद्धालुओं की संख्या प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि बदबू और गंदगी के कारण प्रसाद बेचने में भी कठिनाई होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर शौचालयों का दूषित पानी भी गंगा में मिल रहा है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।
वहीं पंडा रामप्रकाश ने बताया कि ऊपर से आने वाला गंदा पानी, मिट्टी और कचरा घाट पर जमा हो जाता है। ऐसे में पूजा-अर्चना कराने और श्रद्धालुओं के बैठने तक में दिक्कत होती है। उनका कहना है कि कई बार स्थानीय स्तर पर शिकायत की गई, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।
पंडा समाज का आरोप है कि ग्राम प्रधान, सचिव और संबंधित अधिकारियों को कई बार इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। समस्या के समाधान की मांग को लेकर शिव शक्ति अखाड़ा के पदाधिकारियों ने प्रभारी मंत्री को ज्ञापन सौंपते हुए गंगा में गिर रहे गंदे नालों को तत्काल बंद कराने और स्थायी जल निकासी व्यवस्था विकसित कराने की मांग की है।
प्रभारी मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि मामले की जांच कराई जाएगी। यदि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों का उल्लंघन पाया गया तो संबंधित विभागों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी तथा गंगा में गंदा पानी गिरने से रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
गंगा भारतीय संस्कृति, आस्था और करोड़ों लोगों की जीवनरेखा है। ऐसे में पांचाल घाट जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल पर प्रदूषण की यह स्थिति न केवल पर्यावरण के लिए चिंता का विषय है, बल्कि श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं से भी जुड़ा गंभीर मामला है। स्थानीय लोगों और पंडा समाज ने जिला प्रशासन, नगर निकाय, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा संबंधित विभागों से मांग की है कि संयुक्त निरीक्षण कर तत्काल प्रभाव से गंगा में गिर रहे गंदे पानी को रोका जाए, दोषियों की जिम्मेदारी तय की जाए और स्थायी जल निकासी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि गंगा की निर्मलता और पांचाल घाट की गरिमा बनी रहे।


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