432 स्वास्थ्य शिविरों में पहुंची मेडिकल टीमें, 19,363 ओआरएस पैकेट और 29,419 क्लोरीन टैबलेट बांटकर बीमारी से बचाव की कवायद तेज
फर्रुखाबाद/ बाढ़ का पानी भले ही कई इलाकों में धीरे-धीरे कम होने लगा हो, लेकिन इसके बाद फैलने वाली बीमारियों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। डायरिया, बुखार, डिहाइड्रेशन, त्वचा रोग और संक्रमण जैसी बीमारियों से लोगों को बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक स्वास्थ्य अभियान छेड़ दिया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद उपाध्याय के निर्देशन में मेडिकल टीमें गांव-गांव पहुंचकर लोगों की जांच करने के साथ उन्हें आवश्यक दवाएं उपलब्ध करा रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी अभियान के आंकड़ों के मुताबिक अब तक 23,811 मरीजों का इलाज किया जा चुका है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार सक्रिय रखने के लिए 198 मेडिकल टीमें मैदान में उतारी गई हैं। इन टीमों की ओर से अलग-अलग स्थानों पर अब तक 432 स्वास्थ्य शिविर लगाए जा चुके हैं।
डिहाइड्रेशन से बचाने को ओआरएस, पानी को सुरक्षित बनाने की कवायद
बाढ़ के बाद दूषित पानी और गंदगी से होने वाली बीमारियों की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की ओर से बड़े पैमाने पर बचाव सामग्री भी वितरित की जा रही है। लोगों को डायरिया और डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए 19,363 ओआरएस पैकेट बांटे जा चुके हैं। वहीं पीने के पानी को सुरक्षित बनाने के लिए 29,419 क्लोरीन टैबलेट वितरित की गई हैं।
गंभीर मरीजों पर खास नजर, जरूरत पर अस्पताल भेजने के निर्देश
स्वास्थ्य विभाग की टीमें बाढ़ प्रभावित गांवों में लगातार भ्रमण कर रही हैं। मेडिकल टीमें लोगों की स्वास्थ्य जांच कर बुखार, उल्टी-दस्त, त्वचा संबंधी बीमारी, कमजोरी और डिहाइड्रेशन जैसे लक्षणों की जानकारी ले रही हैं। गंभीर स्थिति वाले मरीजों की तत्काल पहचान कर उन्हें बेहतर उपचार के लिए बड़े अस्पतालों में रेफर करने के निर्देश दिए गए हैं।
सीएमओ डॉ. आनंद उपाध्याय ने स्वास्थ्य टीमों को निर्देशित किया है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में किसी भी व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर इलाज में देरी न हो। साथ ही दवाओं, ओआरएस और क्लोरीन टैबलेट की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है।
साफ पानी और सफाई को लेकर लोगों को किया जा रहा जागरूक
स्वास्थ्य विभाग की ओर से ग्रामीणों को बाढ़ के बाद विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। लोगों से कहा जा रहा है कि पीने के लिए साफ पानी का ही इस्तेमाल करें। पानी को उबालकर अथवा निर्धारित तरीके से क्लोरीन टैबलेट का प्रयोग कर ही पीने की सलाह दी जा रही है। घर और आसपास जमा गंदगी को हटाने तथा साफ-सफाई रखने के लिए भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि बाढ़ के बाद बीमारी के लक्षणों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। बुखार, उल्टी, दस्त, अत्यधिक कमजोरी या डिहाइड्रेशन जैसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करना चाहिए। विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी बनाए हुए हैं, ताकि बाढ़ के बाद किसी भी संभावित बीमारी को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित किया जा सके।


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