फर्रुखाबाद/कुछ दिनों तक जलस्तर घटने से राहत की सांस ले रहे तटवर्ती इलाकों के लोगों की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ने लगी हैं। गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ते हुए शनिवार शाम 136.95 मीटर पर पहुंच गया। गंगा का पानी चेतावनी बिंदु 136.60 मीटर से 35 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है और अब यह खतरे के निशान 137.10 मीटर से महज 15 सेंटीमीटर नीचे रह गया है। जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने प्रशासन के साथ-साथ ग्रामीणों की चिंता भी बढ़ा दी है।
पिछले कुछ दिनों में गंगा का पानी कम होने लगा था, जिससे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को कुछ राहत मिली थी। लेकिन बीते दो दिनों से नदी के जलस्तर में दोबारा तेजी से वृद्धि होने लगी है। पानी बढ़ने के साथ ही तटवर्ती गांवों में फिर से बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। जिले के करीब 102 गांव अभी भी बाढ़ की चपेट में हैं। इन गांवों में रहने वाले ग्रामीणों की परेशानियां जलस्तर बढ़ने के साथ दोबारा बढ़ती नजर आ रही हैं।
रामगंगा भी बढ़ी, चेतावनी बिंदु के करीब
गंगा के साथ रामगंगा नदी का जलस्तर भी चिंता बढ़ा रहा है। रामगंगा का जलस्तर 136.45 मीटर दर्ज किया गया। इसका चेतावनी बिंदु 136.60 मीटर है। यानी रामगंगा भी चेतावनी बिंदु से महज 15 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। दोनों नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए तटवर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है।
कटान ने बढ़ाई ग्रामीणों की चिंता
जलस्तर बढ़ने के साथ गंगा के कटान का खतरा भी बढ़ गया है। कटरी तौफीक गांव में नदी के कटान को रोकने के लिए प्रशासन की ओर से युद्ध स्तर पर काम कराया जा रहा है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि जलस्तर में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो कटान की समस्या और गंभीर हो सकती है। नदी के किनारे बसे लोगों की निगाहें लगातार गंगा के बढ़ते पानी पर टिकी हुई हैं।
राहत सामग्री वितरण जारी
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्य जारी रखा है। राजस्व विभाग की टीमें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर जरूरतमंद परिवारों को आपदा राहत सामग्री उपलब्ध करा रही हैं। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर के अनुसार प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यकतानुसार राहत एवं बचाव कार्य किए जा रहे हैं। अधिकारियों और संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
पानी बढ़ा तो फिर मुश्किल होगी राह
गंगा के खतरे के निशान से महज 15 सेंटीमीटर नीचे पहुंचने के बाद तटवर्ती ग्रामीणों की चिंता स्वाभाविक रूप से बढ़ गई है। ग्रामीणों को डर है कि यदि नदी का जलस्तर और बढ़ा तो पहले से प्रभावित गांवों में आवागमन, पशुओं के चारे और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी दिक्कतें फिर गंभीर हो सकती हैं। फिलहाल प्रशासन की निगाह नदी के जलस्तर पर बनी हुई है और ग्रामीण भी हर घंटे बदलते हालात पर नजर रख रहे हैं।


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