गंगा की विनाशलीला से उजड़ रहा मड़ैया गांव, करोड़ों की बाढ़ सुरक्षा योजना ध्वस्त! गरीब किसानों के आशियाने नदी में समाए, क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?

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फर्रुखाबाद/ सदर तहसील क्षेत्र के दिलीप की मड़ैया गांव में गंगा नदी का बढ़ता जलस्तर अब ग्रामीणों के लिए भयावह संकट बन चुका है। लगातार हो रही तेज कटान से गांव का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। बीते तीन दिनों में दो गरीब किसानों के मकान गंगा की धारा में समा चुके हैं, जबकि कई अन्य घर भी नदी के निशाने पर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो पूरा गांव गंगा में समा सकता है।

तड़के करीब चार बजे अचानक कटान तेज होने से गांव में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीण अपनी गृहस्थी बचाने के लिए इधर-उधर सामान हटाने में जुट गए। लेकिन देखते ही देखते जितेंद्र कुमार और रुप्पन के मकान गंगा की तेज धारा में समा गए। इस घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है और लोग रात-रात भर जागकर अपने घरों की निगरानी कर रहे हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले वर्ष गांव को कटान से बचाने के लिए लगभग 7.50 करोड़ रुपये की लागत से बीस परकोपाइन (बाढ़ रोधी संरचनाएं) लगाई गई थीं। दावा किया गया था कि इससे गांव पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगा, लेकिन करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यह परियोजना पहली बड़ी परीक्षा में ही विफल साबित होती दिखाई दे रही है। ग्रामीणों का कहना है कि गंगा की धारा ने इस बार अपना रुख बदल लिया है और पश्चिम की बजाय पूर्व दिशा से तेज कटान शुरू कर दी है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह बेअसर हो गई है।

ग्रामीण राजू, संतोषी देवी सहित कई किसानों ने बताया कि उनकी वर्षों की मेहनत, खेत और मकान धीरे-धीरे गंगा में समाते जा रहे हैं। गरीब परिवार खुले आसमान के नीचे आने की कगार पर हैं। उनका कहना है कि प्रशासनिक अधिकारी केवल निरीक्षण कर औपचारिकताएं पूरी कर रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कटान रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।

सूचना मिलने पर क्षेत्रीय लेखपाल रामबरन ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया और रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजने की बात कही। इसके बावजूद ग्रामीणों में यह आशंका बनी हुई है कि यदि तत्काल बाढ़ सुरक्षा विभाग और जिला प्रशासन ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की तो आने वाले दिनों में कई और मकान तथा सैकड़ों बीघा कृषि भूमि गंगा की भेंट चढ़ सकती है।

जिले के लोगों का कहना है कि जब प्रशासन के पास संसाधन उपलब्ध हैं और जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर लगातार जनहित के कार्यों की समीक्षा करते हैं, तब भी यदि पीड़ित ग्रामीणों तक राहत और सुरक्षा समय पर नहीं पहुंच पा रही है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। ग्रामीण मांग कर रहे हैं कि जिला प्रशासन, सिंचाई एवं बाढ़ खंड के अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचकर आपातकालीन बचाव कार्य शुरू कराएं, अतिरिक्त कटानरोधी कार्य कराए जाएं तथा जिन परिवारों के मकान और भूमि का नुकसान हुआ है उन्हें तत्काल आर्थिक सहायता और सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास उपलब्ध कराया जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें केवल आश्वासनों की नहीं, बल्कि तत्काल कार्रवाई की जरूरत है, क्योंकि गंगा का बढ़ता कहर हर गुजरते दिन के साथ उनके सपनों और आशियानों को निगलता जा रहा है।

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