देशभक्ति केवल शब्दों में व्यक्त नहीं होती, कभी-कभी यह कर्म के उस सर्वोच्च स्तर पर जाकर सिद्ध होती है, जहाँ इंसान अपनी जान की परवाह भी छोड़ देता है। चंदौली जिले के बलुआ थाना क्षेत्र स्थित बड़गावा गांव में एक ऐसी ही दिल दहला देने वाली और देशभक्ति से ओत-प्रोत घटना सामने आई है, जिसे सुनकर हर किसी की आँखें नम हैं और सीना गर्व से चौड़ा हो रहा है।
🔹 क्या है पूरी घटना?
स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) के अवसर पर गांव के युवाओं और बच्चों ने गंगा के रेतीले तट पर बड़े ही उत्साह के साथ राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया था। यह वही स्थान था, जहाँ 24 वर्षीय सोएब खान रोज़ सुबह अपने सपनों को साकार करने के लिए दौड़ लगाता था और शारीरिक अभ्यास करता था।
16 अगस्त की रात हुई मुसलाधार बारिश के कारण गंगा नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। 17 अगस्त की सुबह जब सोएब वहां पहुंचा, तो उसने देखा कि उफान मारती गंगा का पानी उस रेतीले तट तक पहुंच चुका है और हमारा राष्ट्रीय ध्वज जलमग्न होकर पानी के तेज बहाव में बहने की कगार पर है।
तिरंगे की मर्यादा बचाने नदी में छलांग
सोएब का परिवार पीढ़ियों से देश सेवा से जुड़ा रहा है:
पिता जुबेर खान: भारतीय सेना (Indian Army) से सेवानिवृत्त फौजी।
चाचा: यूपी पुलिस क्राइम ब्रांच में हवलदार।
बड़ा भाई आसिफ: हैदराबाद में सेफ्टी ऑफिसर।
देशभक्ति का यही जज्बा सोएब की रगों में भी दौड़ रहा था। वह खुद NDRF, SSC, यूपी पुलिस और UPSI जैसी प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी में दिन-रात जुटा हुआ था।
जब सोएब ने राष्ट्रध्वज को जलमग्न होते देखा, तो उससे रहा नहीं गया। बिना अपनी जान की परवाह किए, तिरंगे को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए वह गंगा की तेज और भयानक धारा में उतर गया। लेकिन नदी की गहराई और तेज बहाव के कारण उसका संतुलन बिगड़ गया और वह गहरे पानी में डूबने लगा।
साथ मौजूद साथी रेहान खान और अन्य दोस्तों ने उसे बचाने की जानलेवा कोशिश की और काफी मशक्कत के बाद उसे पानी से बाहर निकालकर अस्पताल के लिए भागे, लेकिन रास्ते में ही इस वीर होनहार ने दम तोड़ दिया।
पूरे गांव में पसरा मातम, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
सोएब की असमय मौत की खबर मिलते ही उसके माता-पिता, भाई-बहनों और पूरे बड़गावा गांव में कोहराम मच गया। जिस बेटे को एनडीआरएफ या पुलिस की वर्दी में देश की सेवा करते देखने का सपना पूरा परिवार देख रहा था, वह राष्ट्रध्वज का मान रखते हुए अपनी शहादत दे गया।
सोएब खान की यह कुर्बानी हमें सिखाती है कि तिरंगे का सम्मान किसी भी नागरिक के लिए उसकी अपनी सांसों से भी बढ़कर होता है। सोएब भले ही आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसका यह साहस, त्याग और राष्ट्रध्वज के प्रति अतुलनीय निष्ठा हमेशा अमर रहेगी।


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