अमृतपुर/फर्रुखाबाद/ गंगा की बाढ़ से करीब डेढ़ महीने से घिरे तीसराम की मड़ैया कटरी तौफीक गांव में अब जलभराव के साथ बीमारी का संकट भी गहराता जा रहा है। गांव में कई ग्रामीणों के बुखार की चपेट में आने की बात सामने आई है। इसी बीच बुखार से पीड़ित तीन वर्षीय मासूम सुनैना की इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं उसकी मां गंगा देवी की हालत गंभीर होने पर उन्हें नाव और बाइक के सहारे लोहिया जिला अस्पताल पहुंचाया गया।
बताया गया कि गंगा देवी (35) पत्नी मनजीत ने करीब 11 दिन पहले बेटे को जन्म दिया था। प्रसव के बाद से ही वह पिछले करीब सात दिनों से बुखार से परेशान थीं। सोमवार देर शाम अचानक हालत बिगड़ने पर परिजनों ने उन्हें नाव से जमापुर तक पहुंचाया। इसके बाद बाइक से उन्हें लोहिया जिला अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में जांच के दौरान उनके शरीर में खून की गंभीर कमी सामने आने की बात परिजनों ने बताई है। फिलहाल उनका उपचार चल रहा है।
एक ही परिवार में बीमारी ने मचाई तबाही
गंगा देवी की तीन वर्षीय बेटी सुनैना भी काफी समय से बुखार से पीड़ित बताई गई थी। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिवार में मां और बच्चों के एक साथ बीमार पड़ने से परिजन परेशान हैं। गंगा देवी का बेटा विवेक भी बुखार से पीड़ित बताया गया है, जबकि शिवम और राघव उपचार के बाद स्वस्थ हो चुके हैं।
नवजात को छोड़ मां को जाना पड़ा अस्पताल
गंगा देवी ने महज 11 दिन पहले बेटे को जन्म दिया था। खुद बीमारी से जूझने के बावजूद हालत बिगड़ने पर उन्हें इलाज के लिए अस्पताल जाना पड़ा। मां के अस्पताल पहुंचने के बाद 11 दिन के नवजात की देखभाल परिवार के अन्य सदस्य कर रहे हैं।
बाढ़ ने इलाज की राह भी की मुश्किल
गांव चारों ओर से बाढ़ के पानी से घिरा होने के कारण ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी समस्या मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने की है। गंगा देवी को भी पहले नाव से जमापुर और फिर बाइक से जिला अस्पताल तक ले जाना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में बीमारी की स्थिति बिगड़ने पर अस्पताल पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं है।
एसडीएम ने स्वास्थ्य विभाग को दिए कैंप के निर्देश
अमृतपुर की उप जिलाधिकारी श्वेता साहू ने बताया कि प्रभावित गांवों में लगातार स्वास्थ्य कैंप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की टीम को दोबारा गांव में कैंप लगाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही मच्छरों के प्रजनन पर रोक के लिए एंटी लार्वा का छिड़काव भी कराया जा रहा है।
बाढ़ के पानी के बीच बीमारी से जूझ रहे ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती बना हुआ है। ग्रामीणों को अब स्वास्थ्य विभाग की टीमों से लगातार निगरानी और तत्काल उपचार की उम्मीद है।


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