फर्रुखाबाद/ जिले में लगातार हो रही बारिश अब गरीब और कमजोर परिवारों के लिए आफत बनती जा रही है। मऊदरवाजा थाना क्षेत्र में दो अलग-अलग मोहल्लों में बारिश के चलते मकान ढहने से दो परिवारों के सिर से छत छिन गई। हादसों में गनीमत रही कि कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन मकान के मलबे में गृहस्थी का सामान दब जाने से पीड़ित परिवारों के सामने रहने और रोजमर्रा की जरूरतों का संकट खड़ा हो गया है।
दीवान मुबारक मोहल्ले में विधवा का कच्चा मकान ढहा
दीवान मुबारक मोहल्ले में रहने वाली विधवा शकीला बेगम का कच्चा मकान लगातार बारिश के बीच अचानक भरभराकर गिर गया। मकान की हालत पहले से ही जर्जर बताई जा रही थी। पति के निधन के बाद आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह मकान की मरम्मत नहीं करा सकीं। हादसे के बाद परिवार खुले आसमान के नीचे आने को मजबूर हो गया।
बताया गया कि शकीला बेगम के छह बच्चे हैं। इनमें एक बेटा पैरालिसिस से पीड़ित है। ऐसे में मकान गिरने के बाद परिवार की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। मलबे में घरेलू सामान दब जाने से परिवार के सामने आर्थिक संकट भी गहरा गया है।
दाऊदखां में मजदूर भाइयों का पक्का कमरा भी नहीं बचा
दूसरी घटना दाऊदखां मोहल्ले में हुई, जहां मजदूर दिलशाद और उनके भाई इरफान का पक्का कमरा लगातार बारिश के बीच ढह गया। बताया गया कि बारिश के कारण कमरे का लेंटर कमजोर हो गया था और देखते ही देखते पूरा कमरा धराशायी हो गया।
दिलशाद ने समय रहते सूझबूझ दिखाई और पड़ोसी की भैंस तथा ई-रिक्शा को सुरक्षित स्थान पर निकाल लिया। इससे बड़ा नुकसान होने से बच गया। हालांकि मकान गिरने के बाद परिवार की गृहस्थी प्रभावित हुई है।
प्रशासन से तत्काल राहत की मांग
मकान गिरने की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और पीड़ित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर रहने की सलाह दी। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि दोनों परिवारों की स्थिति का तत्काल स्थलीय निरीक्षण कराया जाए और आपदा राहत के तहत आर्थिक सहायता, रहने के लिए अस्थायी व्यवस्था तथा आवश्यक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जाए।
लोगों का कहना है कि बारिश के बीच जर्जर मकानों में रहने वाले गरीब परिवारों का सर्वे कराकर उन्हें समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाना चाहिए। साथ ही पात्र परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि उन्हें दोबारा ऐसे हादसे का सामना न करना पड़े।
अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इन बेघर परिवारों की स्थिति का संज्ञान लेकर कितनी जल्दी मौके पर पहुंचते हैं और पीड़ितों को राहत उपलब्ध कराते हैं।


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