हरदोई: निजीकरण के दुष्प्रभावों को दृष्टिगत रखते हुए राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन उ०प्र० के द्वारा पूर्वाचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के निजीकरण किये जाने के निर्णय के विरोध में विद्युत कार्मिकों/अवर अभियन्ताओं/अभियन्ताओं तथा विद्युत उपभोक्ताओं व प्रतियोगी छात्रों के व्यापक जनहित में प्रदेश सरकार का ध्यानाकृष्ट करते हुए निजीकरण के निर्णय को वापस लेने बाइक रैली निकाली गई। ज्ञापन में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश पॉवर कारपोरेशन लिमिटेड के आधीन पूर्वाचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड, वाराणसी और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड, आगरा को ऊर्जा प्रबन्धन द्वारा एक तरफा निजीकरण किये जाने के निर्णय से विद्युत कर्मचारियों अवर अभियन्ताओं के नौकरी खतरे में होने के साथ ही विद्युत उपभोक्ताओं के हित भी बुरी तरह से प्रभावित होना निश्चित है। ऊर्जा प्रबन्धन के एक तरफा निजीकरण के निर्णय से बिजली के बिल में बेतहाशा वृद्धि होना भी तय है। क्योकि वर्तमान में सरकार द्वारा विद्युत उपभोक्ताओं को कॉस सब्सिडी के माध्यम से सस्ती बिजली दर पर विद्युत की आपूर्ति की जाती है।
यह भी उल्लेखनीय है कि पॉवर कारपोरेशन लिमिटेड जो कि सरकार के नियंत्रणाधीन सार्वजनिक क्षेत्र का निगम होने के कारण कृषि के लिए किसानों को मुफ्त बिजली देती है, जबकि निजीकरण हो जानें के बाद कदाचित ये संभव नहीं है। इसके अतिरिक्त उपरोक्त डिस्काम में कुल 42 जनपदों का एक साथ निजीकरण हो जाने से सार्वजनिक/सरकारी क्षेत्र में नौकरी के अवसर भी अवश्यमेव घटेंगे जिससे तकनीकी शिक्षा जैसे आईटीआई, डिप्लोमा, बीटेक आदि कर रहे छात्रों के सपनों पर कुठाराघात होगा। इसके अतिरिक्त गैर तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर सरकारी नौकरी की आस में लगे प्रतियोगी छात्रों के भविष्य भी प्रभावित होंगे।


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