शाहजहांपुर परौर/कहते हैं कि स्कूल शिक्षा का मंदिर होता है, लेकिन जब मंदिर के पुजारी ही समय पर न पहुंचें तो श्रद्धा डगमगा ही जाती है। ऐसा ही नज़ारा उस समय देखने को मिला जब क्षेत्र भ्रमण पर निकले कटरा विधायक वीर विक्रम सिंह प्रिंस को प्राथमिक विद्यालय बोझी में ताला जैसी स्थिति मिली। समय था दोपहर 12:45 बजे — यानी पढ़ाई का चरम समय — लेकिन विद्यालय में न तो कक्षा में आवाज़ थी, न ब्लैकबोर्ड पर चॉक की लकीर।
सूचना मिलते ही विधायक ने इंचार्ज प्रधानाध्यापक मोहम्मद अनस से मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया, मगर फोन ने भी मानो छुट्टी ले रखी थी। ग्रामीणों ने मौके पर बताया कि “साहब, मास्टर साहब अक्सर देर से आते हैं, कई दिन तो पूरा स्टाफ ही नदारद रहता है।” बच्चों का भविष्य जहां किताबों से बनना था, वहां इंतज़ार और अनुपस्थिति की कहानी लिखी जा रही थी।
ग्रामीणों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए विधायक ने विभागीय अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। जांच में बिना सूचना अनुपस्थित रहने, विभागीय आदेशों की अवहेलना तथा शिक्षक आचरण नियमावली के उल्लंघन के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। तभी इंचार्ज प्रधानाध्यापक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया और उन्हें ब्लॉक संसाधन केंद्र मिर्जापुर से अटैच कर दिया गया है।।
गांव में इस कार्रवाई के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म है। लोग कह रहे हैं कि “अगर निरीक्षण ऐसे ही होते रहें, तो शायद स्कूलों में पढ़ाई भी नियमित हो जाए।” सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या केवल एक निलंबन से व्यवस्था सुधरेगी, या फिर पूरे तंत्र को आईना दिखाने की जरूरत है?
फिलहाल, बच्चों के अभिभावकों को उम्मीद है कि अब विद्यालय में समय से शिक्षक पहुंचेंगे और शिक्षा का दीपक फिर से नियमित रूप से जलेगा। विधायक के इस कदम को ग्रामीणों ने सराहा है, लेकिन यह भी कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं होनी चाहिए — क्योंकि यहां बात भविष्य की है, और भविष्य इंतजार नहीं करता।
Report furkan khan


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