68वें सालाना उर्स का हुआ भव्य आगाज, दरगाह बाबा जुही शाह पर उमड़ी अकीदतमंदों की भीड़

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कायमगंज, फर्रुखाबाद। कस्बे की ऐतिहासिक एवं प्रसिद्ध दरगाह हजरत बाबा जुही शाह पर आयोजित 68वें तीन दिवसीय सालाना उर्स का शुभारंभ बुधवार को बेहद श्रद्धा, आस्था और अकीदत के माहौल में हुआ। उर्स के पहले दिन ही दरगाह परिसर में हजारों अकीदतमंदों की मौजूदगी ने आध्यात्मिक वातावरण को और भी भक्तिमय बना दिया। नगर सहित दूर-दराज के जनपदों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा की बारगाह में चादर और फूल पेश कर देश में अमन-चैन, खुशहाली तथा तरक्की की दुआएं मांगीं।
उर्स का आगाज कुरान मजीद की तिलावत और फातिहाख्वानी के साथ किया गया। इस अवसर पर दरगाह परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ सामाजिक सद्भाव और भाईचारे का अनूठा दृश्य देखने को मिला। विभिन्न समुदायों के लोगों ने एक साथ मिलकर कार्यक्रम में भाग लिया, जिससे गंगा-जमुनी तहजीब की खूबसूरत झलक दिखाई दी।
दरगाह के सज्जादानशीन एवं जानशीन सूफी हजरत मुशीर अहमद कादरी चिश्ती वारसी ने बताया कि यह उर्स हजरत बाबा जुही शाह के विसाल (पुण्यतिथि) की याद में प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है। उन्होंने कहा कि बाबा जुही शाह की शिक्षाएं प्रेम, भाईचारे, मानवता और आपसी सौहार्द का संदेश देती हैं। यही कारण है कि हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचकर उनकी शिक्षाओं से प्रेरणा लेते हैं और समाज में प्रेम तथा सद्भाव बनाए रखने का संकल्प लेते हैं।
डेढ़ सौ वर्षों से चली आ रही है अनूठी परंपरा
सूफी हजरत मुशीर अहमद कादरी चिश्ती वारसी ने दरगाह की लगभग डेढ़ सौ वर्ष पुरानी परंपरा का उल्लेख करते हुए बताया कि बाबा जुही शाह के समय से ही फातिहा के बाद साधु-संतों का सम्मान करने की परंपरा चली आ रही है। इस परंपरा के अंतर्गत साधु-संतों को सम्मानपूर्वक भोजन कराया जाता है तथा उन्हें वस्त्र एवं दक्षिणा भेंट स्वरूप प्रदान की जाती है।
उन्होंने कहा कि यह परंपरा केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक एकता और आपसी सम्मान का प्रतीक है। वर्षों से चली आ रही यह व्यवस्था आज भी उसी श्रद्धा और समर्पण के साथ निभाई जा रही है, जो इस दरगाह की विशेष पहचान बन चुकी है।
कन्या भोज में दिखी सामाजिक समरसता
उर्स के अवसर पर आयोजित कन्या भोज में भी बड़ी संख्या में लोगों ने सहभागिता की। विभिन्न समुदायों के लोगों ने मिलकर कार्यक्रम को सफल बनाया। कन्याओं को सम्मानपूर्वक भोजन कराया गया और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया गया। इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि धार्मिक आयोजनों के माध्यम से सामाजिक समरसता और भाईचारे को मजबूत किया जा सकता है।
श्रद्धालुओं ने मांगी अमन और खुशहाली की दुआ
उर्स में पहुंचे अकीदतमंदों ने बाबा की बारगाह में चादरपोशी कर अपने परिवार, समाज और देश की खुशहाली के लिए दुआएं मांगीं। लोगों ने कहा कि दरगाह बाबा जुही शाह आस्था का एक ऐसा केंद्र है, जहां हर धर्म और समुदाय के लोग अपनी मन्नतें लेकर आते हैं और यहां से उन्हें मानसिक शांति एवं आध्यात्मिक संतोष प्राप्त होता है।
उर्स के दौरान दरगाह परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। सुरक्षा और व्यवस्थाओं के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। आगामी दिनों में कव्वाली, धार्मिक महफिलों और अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है।
दरगाह बाबा जुही शाह का यह सालाना उर्स न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि सामाजिक सद्भाव, भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब की जीवंत मिसाल भी है, जो वर्षों से लोगों को एकता और प्रेम का संदेश देता आ रहा है।
इस मौक़े पर कांग्रेस वरिष्ठ नेता व युवाओं के लोकप्रिय नेता जुनैद मम्मा ने ज़्यारत की जहाँ पर उन्हें सम्मानित भी किया गया वहाँ मौजूद उनके समर्थकों ने उमर खुर्शीद ज़िंदाबाद जुनैद मम्मा ज़िंदाबाद के नारे लगाए उर्स का कल शाम का आग़ाज़ हुआ जो तीन दिन तक चलेगा

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