महोलिया प्राथमिक विद्यालय में पंजीकरण से लेकर मिड-डे मील तक बदहाल मिली व्यवस्था, शिक्षकों और अफसरों को लगाई कड़ी फटकार
फर्रुखाबाद। जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने शनिवार को विकासखंड राजेपुर के प्राथमिक विद्यालय महोलिया का औचक निरीक्षण कर शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत परखी। डीएम के अचानक विद्यालय पहुंचते ही स्कूल में हड़कंप मच गया। निरीक्षण के दौरान विद्यालय में छात्र पंजीकरण, शिक्षक उपस्थिति, साफ-सफाई, मध्यान्ह भोजन और अनुशासन समेत कई व्यवस्थाएं उम्मीद के मुताबिक नहीं मिलीं। अव्यवस्थाओं पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताते हुए संबंधित शिक्षकों और अधिकारियों को तत्काल सुधार के कड़े निर्देश दिए।
विद्यालय पहुंचकर जिलाधिकारी ने सबसे पहले शैक्षणिक व्यवस्था और बच्चों की उपस्थिति का जायजा लिया। उन्होंने छात्र पंजीकरण की स्थिति की जानकारी ली और शिक्षकों से बच्चों की नियमित उपस्थिति तथा नामांकन बढ़ाने के संबंध में जानकारी मांगी। डीएम ने स्पष्ट किया कि सरकारी विद्यालयों में बच्चों का नामांकन और उनकी नियमित उपस्थिति बढ़ाना प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके साथ ही प्रत्येक बच्चे के शैक्षिक स्तर का नियमित मूल्यांकन कर कमजोर विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
शिक्षकों की समय से उपस्थिति पर सख्ती
निरीक्षण के दौरान शिक्षक उपस्थिति और विद्यालय अनुशासन को लेकर भी जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई। उन्होंने शिक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे निर्धारित समय पर विद्यालय पहुंचें और पूरी जिम्मेदारी के साथ शिक्षण कार्य करें। बच्चों की पढ़ाई में किसी प्रकार की लापरवाही न हो और विद्यालय में ऐसा वातावरण तैयार किया जाए, जहां बच्चे नियमित रूप से स्कूल आने के लिए प्रेरित हों।
डीएम ने कहा कि विद्यालय में केवल बच्चों का नामांकन होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना भी जरूरी है। शिक्षकों को बच्चों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान देने और उनके सीखने के स्तर में सुधार लाने के लिए प्रभावी प्रयास करने को कहा गया।
मिड-डे मील और सफाई व्यवस्था पर भी उठे सवाल
विद्यालय की मध्यान्ह भोजन व्यवस्था का भी जिलाधिकारी ने निरीक्षण किया। भोजन की गुणवत्ता और बच्चों को उपलब्ध कराए जा रहे भोजन के संबंध में जानकारी लेते हुए उन्होंने निर्धारित मानकों का पूरी तरह पालन करने के निर्देश दिए। डीएम ने कहा कि बच्चों को पौष्टिक, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना विभाग की जिम्मेदारी है। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
विद्यालय परिसर और कक्षाओं में साफ-सफाई की स्थिति को लेकर भी जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई। उन्होंने परिसर में बेहतर स्वच्छता बनाए रखने के साथ-साथ बच्चों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बीईओ को नियमित निगरानी के निर्देश
जिलाधिकारी ने संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी को विद्यालय की व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार कराने और नियमित रूप से निरीक्षण कर स्थिति की निगरानी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों को दूर करने में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं होनी चाहिए।
डीएम ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था से सीधे जुड़े मामलों में लापरवाही का खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ता है। इसलिए शिक्षक और शिक्षा विभाग के अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का पूरी गंभीरता से निर्वहन करें।
डीएम के औचक निरीक्षण से शिक्षा विभाग में हलचल तेज हो गई है। अब देखना यह है कि निरीक्षण में सामने आई कमियों को दूर करने के लिए विद्यालय स्तर पर कितनी तेजी से कदम उठाए जाते हैं। जिलाधिकारी की सख्ती के बाद विद्यालय की व्यवस्थाओं में सुधार की उम्मीद बढ़ गई है।


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