एक मदद, एक मुस्कान: 15 साल से झोपड़ी में रह रहे परिवार को मिला नया जीवन, सपा नेता अजीत यादव ने रखी पक्के घर की नींव

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फर्रुखाबाद/शमसाबाद।

कहते हैं कि अगर इंसान चाहे तो किसी की जिंदगी बदलने के लिए करोड़ों रुपये नहीं, बल्कि नेक इरादा ही काफी होता है। फर्रुखाबाद के शमसाबाद क्षेत्र के गांव बिरियानाडे (जिला पंचायत वाजिदपुर) में एक ऐसी ही मिसाल देखने को मिली, जहां पिछले करीब 15 वर्षों से झोपड़ी और पन्नी के सहारे जिंदगी गुजार रहे एक गरीब परिवार के सपनों को आखिरकार पंख मिल गए।

समाजवादी पार्टी के नेता एवं समाजसेवी अजीत यादव ने इस परिवार की पीड़ा को अपना दर्द समझते हुए उनके लिए पक्का मकान बनवाने की जिम्मेदारी उठाई। विधि-विधान से भूमि पूजन कर मकान की नींव रखी गई तो परिवार की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े।

झोपड़ी में कटे 15 साल, हर बरसात बनती थी नई मुसीबत

गांव निवासी सतेंद्र अपनी पत्नी ज्योति और चार बेटियों—रिया, प्रिया, सुनीति और नम्रता—के साथ वर्षों से बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन बिता रहे थे। बारिश होते ही झोपड़ी में पानी भर जाता था और गंगा का जलस्तर बढ़ने पर पूरा परिवार सड़क किनारे शरण लेने को मजबूर हो जाता था। खुले में रहने के कारण जहरीले जीव-जंतुओं और जंगली जानवरों का भी हमेशा खतरा बना रहता था।

परिवार ने कई बार सरकारी योजनाओं के तहत प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ पाने की कोशिश की, लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी।

चार बेटियों ने बदल दी परिवार की किस्मत

इस परिवार की कहानी तब सामने आई, जब समाजसेवी अनुराग की नजर रोज पैदल स्कूल जाने वाली चारों बच्चियों पर पड़ी। पहले उन्होंने बच्चियों को साइकिल दिलाने का मन बनाया, लेकिन जब उनके घर पहुंचे तो वहां की बदहाल स्थिति देखकर उनका मन द्रवित हो गया।

उन्हें एहसास हुआ कि इन बच्चियों को साइकिल से ज्यादा एक सुरक्षित छत की जरूरत है। इसके बाद उन्होंने पूरी जानकारी समाजसेवी एवं सपा नेता अजीत यादव को दी।

अजीत यादव ने कहा—अब यह परिवार झोपड़ी में नहीं रहेगा

मामले की जानकारी मिलते ही अजीत यादव स्वयं गांव पहुंचे। परिवार की हालत देखने के बाद उन्होंने तत्काल पक्का मकान बनवाने का निर्णय लिया। भूमि पूजन कर निर्माण कार्य का शुभारंभ कराया गया और परिवार को भरोसा दिलाया कि अब उन्हें झोपड़ी में रहने की मजबूरी नहीं होगी।

लड्डू बांटकर मनाई खुशियां, भावुक हुआ परिवार

शिलान्यास के अवसर पर लड्डू बांटकर खुशी मनाई गई। वर्षों बाद अपने घर का सपना साकार होता देख सतेंद्र भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि आज तक किसी ने उनकी इतनी बड़ी मदद नहीं की थी। अब उनके बच्चों को भी सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल में रहने का अवसर मिलेगा।

समाज के लिए बनी प्रेरणा

यह पहल केवल एक परिवार को घर देने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणा भी है। यदि सक्षम लोग अपने आसपास रहने वाले ज
रूरतमंद परिवारों की ओर मदद का हाथ बढ़ाएं, तो न जाने कितने घरों में खुशियां लौट सकती हैं।

एक छोटा-सा सहयोग किसी गरीब के जीवन में सबसे बड़ी खुशी बन सकता है। जरूरत सिर्फ संवेदनशील सोच और मदद करने की इच्छा की है।

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