सत्य बोलना एवं अपने वचन पर अडिग रहना ही मानव का मूलभूत धर्म हैं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वंशज राजेश तिवारी

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सदा सत्य एवं प्रिय बोलना ही असली मनुष्यता है।अपने वचन का परिपालन करना ही असली इन्सानियता है

प्रयागराज
तस्वीर न्यूज़ से ब्यूरो चीफ- विश्वनाथ प्रताप सिंह

सत्य बोलना एवं अपने वचन पर अडिग रहना ही मानव का मूलभूत धर्म है यह अभिव्यक्ति स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वंशज मेजा प्रयागराज के बकचून्दा निवासी राजेश तिवारी ने नवयुवक समाजसेवी अरुण कुमार सिंह(सिन्टू) से उनके निज ग्राम पंचायत लेहड़ी उरुवा प्रयागराज के लेहड़ी चौराहा पर संचालित पेट्रोल पम्प के सामने एक बीटल एण्ड टी स्टॉल पर कही।खबरीकरण कराते चले कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वंशज श्री तिवारी एवं नवयुवक समाजसेवी श्री सिंह के बीच बहुत ही घनिष्ठतम पारिवारिक एवं मैत्रिक सम्बन्ध हैं और दोनों ही सम्भ्रान्त जन एक दूसरे के सुख-दुःख में अवश्य सहभागिता करते रहते हैं।एक विशेष कार्य से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वंशज श्री तिवारी इधर कि पधारे हुए थे उसी दरमियान दोनों ही सम्भ्रान्त जनों की आपसी सौहार्दपूर्ण भेंटवार्ता हुई।आपसी सौहार्दपूर्ण साहित्यिक परिचर्चा के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वंशज श्री तिवारी ने अपने उद्बोधन में कहा कि सत्य बोलना एवं अपने वचन पर अडिग रहना ही मानव का मूलभूत धर्म है क्योंकि मानव का वास्तविक पहचान उसके बोलने वाले वचन एवं उसके कहे वचन के परिपालन से ही होती है जिससे यह पता चलता है कि वह किस प्रवृत्ति का इन्सान है।स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वंशज श्री तिवारी ने आगे कहा कि इस संसार के अन्य प्राणी सत्य के बारे में तनिक भी नही जानते हैं।सत्य का संज्ञान केवल व केवल मानव समाज के प्राणियों में ही निहित है अर्थात सत्य का परिपालन करना केवल मानव समाज के लिए ईश्वर ने स्फुटित किया ताकि मानव समाज का उद्धार हो सके।अपने कहे वचन का परिपालन करना मनुष्य का मूलभूत कर्तव्य है अन्यथा संसार के अन्य प्राणी एवं मनुष्य में क्या अन्तर है।स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वंशज श्री तिवारी ने आगे अपने व्यक्तव्य में यह भी कहा कि सदा सत्य एवं प्रिय बोलना ही असली मनुष्यता है,अपने वचन का परिपालन करना ही असली इन्सानियता है।इस अवसर पर उपस्थित समाजसेवी पं० हरिश्चन्द्र तिवारी ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वंशज श्री तिवारी द्वारा मानव कर्म के मूलभूत ढाँचे एकदम स्पष्ट वचनों में सौ फीसदी सत्यमयता के साथ वर्णित किया है।वास्तव में मानव का मूलभूत धर्म सत्य बोलना एवं अपने वचन पर अडिग रहना ही है तभी उसका कल्याण सम्भव है।इस साहित्यिक एवं आध्यात्मिक परिचर्चा के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वंशज श्री तिवारी के साथ समाजसेवी हरिश्चन्द्र तिवारी,आचार्य प्रकाशानन्द महराज,नवयुवक समाजसेवी अरुण कुमार सिंह(सिन्टू),शिक्षाविद कमलेश पाण्डेय एवं शिक्षाविद जोखू लाल पटेल सहित आस पास बहुत से लोग मौजूद रहे।

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