प्रयागराज नगर निगम में GIS सर्वे को लेकर उठे सवाल
पारदर्शिता, प्रक्रिया और भुगतान को लेकर संदेह गहराया
नगर निगम ने 90,000 से अधिक घरों को जारी किए टैक्स नोटिस, सर्वे सिर्फ पुराने 5 जोनों में, झूसी जैसे नए क्षेत्र उपेक्षित
नागरिकों का आरोप – बिना जानकारी और सत्यापन बढ़ा दिया गया टैक्स ,मकान मालिकों से नहीं हुई कोई सीधी बातचीत या सर्वे
निओ जिओ इन्फोटेक कंपनी को सौंपा गया था सर्वे कार्य, CTO बोले – सर्वे अभी जारी, 80,000 से अधिक मकानों का मिलान बाकी
टेंडर, अनुबंध और भुगतान प्रक्रिया को लेकर बढ़ी अस्पष्टता, नगर निगम की कार्यप्रणाली पर फिर उठे पारदर्शिता के सवाल
प्रयागराज, 28 जुलाई 2025: नगर निगम प्रयागराज एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पहले जहां करोड़ों के टैक्स घोटाले की गूंज सुनाई दी थी, वहीं अब संपत्ति सर्वेक्षण (GIS सर्वे) को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हैं। नगर निगम प्रशासन ने दावा किया है कि अब तक 90,000 से अधिक घरों पर GIS सर्वे आधारित टैक्स लागू किया जा चुका है और नोटिस जारी किए जा रहे हैं, लेकिन यह प्रक्रिया पारदर्शी और समावेशी नहीं दिख रही है।
सूत्रों के अनुसार, GIS सर्वे का जिम्मा न्यू जिओ इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी को सौंपा गया था। इस कंपनी ने बताया कि सर्वे कार्य 2019 में शुरू होकर 2022 में समाप्त हो गया, जबकि नगर निगम के नए सीटीओ पी.के. मिश्रा का कहना है कि सर्वे 2020 में शुरू हुआ और अभी भी जारी है। उन्होंने बताया कि 2 लाख 31,149 मकानों का सर्वे पूरा हो चुका है, जिसमें से 1 लाख 26,547 का डाटा मिलान हो चुका है, जबकि शेष 80,428 मकानों का मिलान अभी बाकी है।
सिर्फ 5 जून क्षेत्र का सर्वे, बाकी क्षेत्र उपेक्षित
गंभीर बात यह है कि यह सर्वे सिर्फ पुराने 5 जोनों तक ही सीमित रहा है। वर्तमान में प्रयागराज नगर निगम में कुल 8 जोन हैं, जिनमें हाल ही में झूसी जैसे नए क्षेत्र जोड़े गए हैं। इन नए क्षेत्रों का सर्वे अब तक नहीं हुआ है। इसके बावजूद 90,000 से अधिक घरों को नोटिस जारी किया जाना यह दर्शाता है कि आधी अधूरी जानकारी के आधार पर टैक्स लागू किया जा रहा है।
सर्वे की प्रक्रिया और गुणवत्ता पर सवाल
सर्वे की पद्धति और निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। कंपनी ने डोर-टू-डोर सत्यापन का दावा किया है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि न तो उनके पास कोई सर्वे टीम आई, न ही उनसे किसी प्रकार की जानकारी ली गई। कई जगह मकान किसी और के नाम दर्ज है, जबकि उसमें कोई और रह रहा है। लोगों को बिना जानकारी दिए टैक्स बढ़ा दिया गया है, जिससे जनआक्रोश बढ़ता जा रहा है।
टेंडर और भुगतान की जानकारी अस्पष्ट
जब कंपनी के टेंडर, अनुबंध और भुगतान की जानकारी ली गई, तो पता चला कि यह अनुबंध लखनऊ स्तर से हुआ है और नगर निगम प्रयागराज को सिर्फ एक पत्र मिला है। अधिकारी यह कहकर बचते नजर आए कि निगम ने कोई भुगतान नहीं किया है। ऐसे में सवाल उठता है कि सर्वे कार्य के लिए धन कहाँ से आया, किस स्तर पर निगरानी थी और भुगतान किसने किया?
प्रयागराज नगर निगम में GIS सर्वे से जुड़े सवाल अब गंभीर होते जा रहे हैं। सीमित क्षेत्रों तक सिमटा सर्वे, अपूर्ण डाटा, बिना सत्यापन के टैक्स नोटिस और टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता का अभाव – ये सभी बातें दर्शाती हैं कि नगर निगम में व्यवस्थागत खामियां मौजूद हैं। अब देखना यह है कि नगर आयुक्त और शासन इस पर क्या कार्रवाई करते हैं, या फिर यह मामला भी पुराने टैक्स घोटाले की तरह दबा दिया जाएगा।


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