हिंदू-मुस्लिम बहनों ने एक साथ बांधी राखी, पुष्पवर्षा से हुआ स्वागत; बोलीं—भैया का साथ हमेशा बना रहे
फर्रुखाबाद/रक्षाबंधन के पावन पर्व पर फर्रुखाबाद में भाई-बहन के रिश्ते के साथ-साथ आपसी सौहार्द की भी शानदार तस्वीर देखने को मिली। फतेहगढ़-फर्रुखाबाद मार्ग स्थित एक विद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व एमएलसी मनोज अग्रवाल को 500 से अधिक बहनों ने राखी बांधकर भाई-बहन के अटूट रिश्ते को और मजबूत किया। खास बात यह रही कि राखी बांधने पहुंचीं बहनों में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों की महिलाएं शामिल रहीं।
कार्यक्रम स्थल पर पूर्व एमएलसी मनोज अग्रवाल अपनी पत्नी एवं नगर पालिकाध्यक्ष वत्सला अग्रवाल और परिवार के साथ पहुंचे तो बहनों ने पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। इसके बाद बहनों ने एक-एक कर मनोज अग्रवाल की कलाई पर राखी बांधी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। अग्रवाल दंपत्ति ने भी सभी बहनों का सम्मान करते हुए उन्हें उपहार देकर रीति-रिवाज के साथ विदाई दी।
गरीब बेटियों का विवाह और निकाह कराते हैं अग्रवाल दंपत्ति
बताया गया कि मनोज अग्रवाल और उनकी पत्नी वत्सला अग्रवाल हर वर्ष अपने स्तर से गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह में सहयोग करते हैं। हिंदू बेटियों का विवाह और मुस्लिम बेटियों का निकाह कराने की परंपरा के चलते बड़ी संख्या में बेटियां उनसे भावनात्मक रूप से जुड़ी हुई हैं। यही बेटियां रक्षाबंधन के मौके पर उन्हें अपना भाई मानकर राखी बांधने पहुंचती हैं। समय के साथ इस आयोजन में शामिल होने वाली बहनों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
राखी के धागों में दिखा धर्म से ऊपर भाई-बहन का रिश्ता
कार्यक्रम में हिंदू-मुस्लिम बहनों का एक साथ राखी बांधना लोगों के बीच चर्चा का विषय रहा। पूरे आयोजन के दौरान भाईचारे और सौहार्द का माहौल दिखाई दिया। बहनों ने कहा कि उनके लिए यह रिश्ता केवल राखी के धागे तक सीमित नहीं, बल्कि विश्वास, सम्मान और अपनत्व का रिश्ता है।
मनोज अग्रवाल बोले—कन्यादान का रिश्ता सगे भाई जैसा प्रेम देता है
इस मौके पर पूर्व एमएलसी मनोज अग्रवाल भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि जिन बेटियों के विवाह में उन्होंने अपनी जिम्मेदारी निभाई और कन्यादान किया, वे उन्हें सगे भाई जैसा ही प्रेम देती हैं। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए किसी सौभाग्य से कम नहीं है। हजारों बहनों का प्यार और आशीर्वाद ही उनके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।
रक्षाबंधन के इस आयोजन ने एक बार फिर संदेश दिया कि रिश्ते खून से ही नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और अपनत्व से भी बनते हैं। 500 से अधिक बहनों की राखियों से सजी मनोज अग्रवाल की कलाई इस भाईचारे और सामाजिक सौहार्द की गवाह बनी।


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