चारों तरफ पानी का सैलाब, फिर भी नहीं रुकीं बहनों की कदमताल; 3 किलोमीटर स्टीमर का सफर तय कर भाइयों की कलाई पर बांधा रक्षा सूत्र
फर्रुखाबाद। गंगा नदी के बढ़े जलस्तर और बाढ़ की विकट परिस्थितियों के बीच रक्षाबंधन का पर्व फर्रुखाबाद में भाई-बहन के अटूट प्रेम की अनोखी तस्वीर लेकर आया। चारों तरफ पानी का सैलाब, रास्ते बंद और आवागमन के साधन सीमित होने के बावजूद बहनों का हौसला नहीं डिगा। भाइयों की कलाई पर राखी बांधने की चाहत उन्हें नाव और स्टीमर तक ले आई। बहनों ने बाढ़ के पानी के बीच सफर तय किया और मायके पहुंचकर भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा।
गंगा का जलस्तर 137.10 मीटर तक पहुंचने के बाद जिले में बाढ़ का असर लगातार बढ़ रहा है। 80 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में बताए जा रहे हैं। अमृतपुर, सदर और कायमगंज तहसील क्षेत्र के कई गांवों में पानी घुस चुका है। इनमें अमृतपुर तहसील सबसे अधिक प्रभावित है। ऐसे हालात में प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन के लिए नाव और स्टीमर लगाए हैं।
तीन किलोमीटर स्टीमर से पहुंचीं सविता
बिलावलपुर के पास स्टीमर से सफर करती मिलीं सविता ने बताया कि उनकी ससुराल नगरिया में है, जबकि मायका कटरी धर्मपुर में है। रक्षाबंधन पर वह अपने तीन भाइयों को राखी बांधने निकली थीं। पहले सवारी से शहर तक पहुंचीं, इसके बाद कुछ दूरी पैदल तय की। आगे बाढ़ का पानी रास्ता रोककर खड़ा था। मायके तक पहुंचने के लिए करीब तीन किलोमीटर का सफर स्टीमर से तय करना पड़ा।
सविता ने कहा कि राखी का त्योहार साल में सिर्फ एक बार आता है। रास्ते में कितनी भी मुश्किल क्यों न हो, लेकिन भाई की कलाई सूनी न रहे, यही सोचकर वह बाढ़ के पानी के बीच मायके पहुंचीं।
मंझा की मड़ैया में नाव बनी जिंदगी की डोर
अमृतपुर तहसील के मंझा की मड़ैया गांव में बाढ़ ने हालात और भी मुश्किल कर दिए हैं। गांव चारों ओर से पानी से घिरा हुआ है। यहां आने-जाने के लिए नाव ही एकमात्र सहारा बनी हुई है। रक्षाबंधन पर जब बहनों को भाइयों की कलाई पर राखी बांधनी थी तो नाव ही उनका सहारा बनी।
बाढ़ के पानी के बीच नाव पर सवार होकर मायके पहुंचती बहनों की तस्वीर ने यह साबित कर दिया कि भाई-बहन के रिश्ते के सामने बड़ी से बड़ी मुश्किल भी छोटी पड़ जाती है। जहां एक ओर बाढ़ ने गांवों की राह रोक दी, वहीं दूसरी ओर बहनों के प्रेम ने हर बाधा को पार कर लिया।
सैलाब के बीच रिश्तों की गर्माहट
फर्रुखाबाद में इस बार रक्षाबंधन का पर्व सिर्फ राखी और मिठाई तक सीमित नहीं रहा। बाढ़ के बीच नाव और स्टीमर से मायके पहुंचती बहनों ने भाई-बहन के रिश्ते की मजबूती की ऐसी मिसाल पेश की, जिसे लंबे समय तक याद किया जाएगा। गंगा की तेज धार के सामने बहनों का यह जज्बा मानो यही संदेश दे रहा था—रास्ते चाहे पानी में डूब जाएं, लेकिन भाई की कलाई तक पहुंचने वाला बहन का प्यार कभी नहीं डूबता।


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