जनपद फर्रुखाबाद में एक झोलाछाप डॉक्टर ने इलाज के बहाने एक नाबालिग लड़की का शारीरिक शोषण किया। आरोपी सुमित ने पीड़िता को शादी का झांसा दिया और खुद को एमबीबीएस डॉक्टर बताकर उसे अपने जाल में फंसाया। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी कई सालों तक किशोरी के साथ दुष्कर्म करता रहा। पीड़िता के पिता ने साल 2021 में नवाबगंज थाने में आरोपी सुमित, उसके भाई और भाभी के खिलाफ केस दर्ज कराया था।
पॉक्सो एक्ट कोर्ट का बड़ा फैसला: 10 साल का कारावास
इस गंभीर मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट)-01 मेराज अहमद की अदालत में हुई। अदालत ने सबूतों और गवाहों के आधार पर आरोपी सुमित को दोषी पाया। कोर्ट ने झोलाछाप डॉक्टर को 10 साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही, दोषी पर 11 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। यदि दोषी जुर्माना नहीं भरता है, तो उसे तीन महीने की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।
उम्र छिपाने के लिए बनाए फर्जी कागजात
सुनवाई के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी सुमित ने कानून से बचने के लिए पीड़िता के फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे। उसने किशोरी को बालिग (वयस्क) दिखाने की पूरी कोशिश की ताकि वह सख्त पॉक्सो कानून से बच सके। हालांकि, स्कूल रिकॉर्ड, मेडिकल रिपोर्ट और पीड़िता के बयानों ने आरोपी के झूठ का पर्दाफाश कर दिया। कोर्ट ने आदेश दिया कि जुर्माने की राशि का 80 प्रतिशत हिस्सा पीड़िता को मुआवजे (प्रतिकर) के तौर पर दिया जाएगा।


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