नैनीताल में नाबालिग शोषण के आरोपी उस्मान की बेल खारिज, HC ने कहा 3 माह में निपटे ट्राय

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उत्तराखंड न्यायालय ने नैनीताल के चर्चित नाबालिग यौन शोषण को जघन्य मानते हुए मो.उस्मान की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ ने राज्य सरकार से कहा है कि वो तीन माह में इससे संबंधित ट्रायल को निस्तारित करे।

   पीड़ित किशोरी के अधिवक्ता पंकज चौहान ने बताया कि आज न्यायालय ने जमानत याचिका को खारिज कर दिया है और सरकार से इस मामले का ट्रायल तीन माह में कराकर मामले को निस्तारित करने को कहा है।     मामले के अनुसार, नैनीताल में बीती 30 अप्रैल 2025 को मल्लीताल कोतवाली में नाबालिग से दुष्कर्म का एक मुकदमा दर्ज हुआ था। घटना को, उसी वर्ष 12 अप्रैल का बताते हुए एक 12 वर्षीय हिन्दू नाबालिग ने 73 वर्षीय मो.उस्मान पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। 

पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तत्काल आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। मल्लीताल कोतवाली में प्रदर्शन करने के बाद आंदोलनरत आक्रोशित लोगों ने कुछ दुकानों में हल्की तोड़फोड़ और कुछ लोगों से मारपीट की। एक मई को शहर में आरोपी को फांसी देने की मांग को लेकर एक भव्य जुलूस आयोजित हुआ, तभी से यहां का माहौल गर्मा गया और पुलिस अपराध के साक्ष्य जुटाने में जुट गई।

मो.उस्मान की जमानत याचिका तभी से लंबित पड़ी थी, जबकी कुछ न्यायधीशों ने इस बेल को सुनने से इनकार भी किया था। आज एकलपीठ ने जमानत याचिका को खारिज कर दिया है, जिससे अब उस्मान की बेल का रास्ता सुप्रीम कोर्ट से तय होगा।

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